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अमित शाह की बात भी नहीं आई काम, अपने रुख पर अड़े किसान

दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे पंजाब और हरियाणा के किसानों के साथ उत्तर प्रदेश व अन्य प्रांतों के किसान भी जुड़ गए हैं. उधर, केंद्र सरकार भी अपने रुख पर कायम है.

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 29 Nov 2020, 08:54:53 AM
Farmers Agitation

अमित शाह की बात भी नहीं सुन रहे हैं किसान. (Photo Credit: न्यूज नेशन.)

नई दिल्ली:

नये कृषि कानून के विरोध में सड़कों पर उतरे किसान संगठनों का प्रदर्शन रविवार को चौथे दिन भी जारी है. देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे पंजाब और हरियाणा के किसानों के साथ उत्तर प्रदेश व अन्य प्रांतों के किसान भी जुड़ गए हैं. उधर, केंद्र सरकार भी अपने रुख पर कायम है. सरकार ने किसानों से आंदोलन का रास्ता छोड़कर बातचीत के जरिए मसले का समाधान करने की अपील की है. गृहमंत्री अमित शाह ने किसानों से दिल्ली में बुराड़ी के निर्धारित ग्राउंड में शिफ्ट होने की अपील की है. उन्होंने आश्वासन दिया है कि बुराड़ी ग्राउंड में किसानों के शिफ्ट होने के दूसरे ही दिन सरकार उनकी मांगों पर चर्चा करने के लिए तैयार है

यह अलग बात है कि किसान सिंघू और टीकरी बॉर्डर पर जमे हैं. इनका कहना है कि हमें जंतर मंतर जाने की इजाजत दी जाए, नहीं तो यहीं प्रदर्शन करेंगे. भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) समेत कई अन्य संगठनों से जुड़े किसान नेता दिल्ली की सीमाओं पर डेरा जमाए हुए हैं. उनके साथ हजारों की तादाद में किसान प्रदर्शन कर रहे हैं. हरियाणा में भाकियू के मीडिया प्रभारी राकेश बेंस ने बताया कि रविवार को किसान संगठनों के नेताओं के बीच एक बैठक होगी, जिसमें प्रदर्शन को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी.

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उन्होंने बताया कि पहले ही पंजाब और हरियाणा के किसान प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन अब उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान के साथ-साथ ओडिशा के लोग भी प्रदर्शन में जुट गए हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश से भाकियू के प्रवक्ता राकेश टिकैत की अगुवाई में किसानों का एक दल दिल्ली सीमा पर पहुंचा. इस प्रकार, किसानों के आंदोलन का दायरा धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है. इससे पहले भाकियू के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि अब यह सिर्फ पंजाब के किसानों का आंदोलन नहीं है, बल्कि इसमें पूरे देश के किसान शामिल हैं, लेकिन आंदोलन की रणनीति वही होगी जो पंजाब के किसान संगठनों के नेता तय करेंगे.

नये कृषि कानून को लेकर सबसे ज्यादा विरोध पंजाब में हो रहा है, इसलिए इस प्रदर्शन की अगुवाई भी पंजाब के ही किसान नेता कर रहे हैं. पंजाब के करीब 30 किसान संगठनों के लोग विरोध-प्रदर्शन में जुटे हैं. उधर, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने फिर किसानों से विरोध-प्रदर्शन का रास्ता छोड़कर बातचीत के लिए आने की अपील की. उन्होंने कहा कि तीन दिसंबर को किसान नेताओं को बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया है और उन्हें आंदोलन बंद कर किसानों के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए आना चाहिए.

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कृषि मंत्री के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने भी बड़ा बयान दिया. उन्होंने किसानों से दिल्ली में बुराड़ी के निर्धारित ग्राउंड में शिफ्ट होने की अपील की है. उन्होंने आश्वासन दिया है कि बुराड़ी ग्राउंड में किसानों के शिफ्ट होने के दूसरे ही दिन सरकार उनकी मांगों पर चर्चा करने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा, 'कुछ किसान यूनियन और किसानों की मांग है कि 3 दिसंबर, 2020 की जगह वार्ता जल्द की जाए. तो मैं सभी को आश्वस्त करता हूं कि जैसे ही आप बुराड़ी ग्राउंड शिफ्ट होते हैं उसके दूसरे ही दिन भारत सरकार आपके साथ चर्चा के लिए तैयार है.' 

First Published : 29 Nov 2020, 08:24:44 AM

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