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दिल्ली समेत कई राज्यों में बिजली की किल्लत, केंद्र सरकार सक्रिय

ऊर्जा विकास निगम के आंकड़ों के मुताबिक राज्यों में मांग के मुकाबले काफी कम बिजली सेंट्रल पूल से मिल रही है. नेशनल पावर एक्सचेंज में भी बिजली की किल्लत है. भारत में लगभग 10 हजार मेगावाट बिजली की कमी बताई है.

Written By : मोहित बक्शी | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 10 Oct 2021, 02:02:56 PM
Power Shortage

कोयले के संकट से बिजली उत्पादन पर बुरा असर, कई राज्यों में कमी. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • भारत में लगभग 10 हजार मेगावाट बिजली की कमी
  • दिल्ली में बिजली कटौती पर संयम बरतने की अपील
  • यूपी, झारखंड, बिहार, राजस्थान में भी बढ़ा है संकट

नई दिल्ली:

कोयले की कमी के चलते राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में अभूतपूर्व बिजली संकट दस्तक दे रहा है. दिल्ली में तो उत्तर और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में बिजली की आपूर्ति करने वाली टाटा पावर ने उपभोक्ताओं को बकायदा दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक कटौती की स्थिति में संयम बरतने को कहा है. उत्तर प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, बिहार समेत कई अन्य राज्यों में मांग की तुलना में आपूर्ति में भारी अंतर से कई-कई घंटे बिजली कटौती हो रही है. ऊर्जा विकास निगम के आंकड़ों के मुताबिक राज्यों में मांग के मुकाबले काफी कम बिजली सेंट्रल पूल से मिल रही है. नेशनल पावर एक्सचेंज में भी बिजली की किल्लत है. अगर आंकड़ों की भाषा में बात करें तो समग्र भारत में लगभग 10 हजार मेगावाट बिजली की कमी बताई है. राजधानी दिल्ली में तो बिजली आपूर्ति करने वाली तीनों बिजली कंपनियों बीएसआईएस राजधानी, बीएसईएस यमुना और टीपीडीडीएल के अधिकारी उर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन के साथ बैठक कर रहे हैं. त्योहारी सीजन में बिजली कटौती से लोगों में भारी रोष है. हालांकि केंद्रीय मंत्री आर के सिंह का कहना है दिल्ली को बिजली संकट झेलने नहीं होने देंगे.

कोयले का स्‍टॉक हो रहा खत्‍म
जानकारों की मानें तो कोरोना महामारी से उबर रही भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में कोरोना लॉकडाउन में ढील से तेजी आई है. ऐसे में उद्योग-धंधे शुरू होने से बिजली की खपत भी बढ़ी है. इस क्रम में बिजली की मांग 2019 के मुकाबले पिछले दो महीनों में 17 प्रतिशत बढ़ गई है. इस बीच पूरी दुनिया में कोयले के दाम बढ़ गए हैं और भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला आयातक है. इस परिप्रेक्ष्य में देखें तो उसका कोयला आयात दो साल के न्‍यूनतम स्‍तर पर है. आयात घटने से जो प्‍लांट विदेशी कोयले से चलते थे, वे भी देश में उत्‍पादित कोयले से चलने लगे. इतनी मात्रा में उत्‍पादन नहीं होने से कोयले की आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया. नतीजतन मांग के सापेक्ष बिजली का उत्पादन नहीं हो पाने से संकट बढ़ रहा है. 

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सालों बाद आई है ऐसी कोयले की कमी
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के मुताबिक 3 अक्टूबर को कोयले से बिजली बनाने वाले 64 प्लांट्स में चार दिन से भी कम का कोयला स्टॉक बचा था. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कोयले से चलने वाले 135 पावर प्लांट्स में से आधे से ज्यादा में सितंबर के आखिरी दिनों में औसतन चार दिन का कोयला ही बचा था. 16 में तो कोयला बचा ही नहीं था कि बिजली का उत्पादन किया जा सके. इसके उलट अगस्त की शुरुआत में इन प्लांट्स के पास औसतन 17 दिनों का कोयला भंडार था. ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों की मानें तो देश में कोयले की इतनी कमी कई सालों बाद देखी गई. इस कमी का सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ा.

दिल्ली समेत कई राज्यों में बिजली की कटौती
कोयले की कमी का असर राजधानी दिल्ली में भी बिजली सप्‍लाई पर पड़ने की आशंका है. टाटा पावर ने तो बकायदा उपभोक्‍ताओं को संदेश भेजकर आगाह तक कर दिया है. इस संदेश में कहा गया है कि दोपहर दो बजे से शाम 6 बजे के बीच बिजली की आपूर्ति में समस्या आ सकती है. टाटा पावर दिल्‍ली डिस्‍ट्रीब्‍यूशन लिमिटेड ने उपभोक्‍ताओं से संयम बरतने का आग्रह किया है. टाटा पावर उत्‍तर और उत्‍तर-पश्चिमी दिल्‍ली में आपूर्ति करती है. 

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उत्तर प्रदेश में भी 15 फीसदी कम बिजली उत्पादन
उत्तर प्रदेश में भी कोयले की कमी से बिजली संकट बढ़ रहा है. करीब 2000 मेगावाट क्षमता की इकाइयां बंद करनी पड़ीं है. ऐसे में उत्तर प्रदेश में बिजली की कटौती भी की जा रही है. उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग लगभग 17000 मेगावाट है, जबकि मौजूदा समय में 15000 मेगावाट के आसपास बिजली उपलब्ध है, जबकि कोयले की कमी से 3000 मेगावाट बिजली इस समय उत्पादित हो पा रही है. ऐसे में 1000 से 1500 मेगावाट तक की कटौती की जा रही है, जिसकी वजह कोयले की कमी को ही माना जा रहा है. 

बिहार-झारखंड में मांग के मुकाबले कम बिजली 
शनिवार को प्राप्त आंकड़ों में झारखंड में बिजली की मांग लगभग 2200 मेगावाट है, लेकिन राज्य को अधिकतम 500 मेगावाट तक की ही बिजली उपलब्ध है. बाकी की मांग सेंट्रल पूल के जरिये उपलब्ध कराई जाने वाली बिजली से होती है. बिहार में भी बिजली उत्पादन में आई कमी ने एक बड़ी परेशानी पैदा कर दी है. बाजार से न्यूनतम चार सौ मेगावाट बिजली बिहार को खरीदनी है. ऐसे में बिजली कंपनी को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा. एनटीपीसी से भी अभी तीन से साढ़े तीन हजार मेगावाट बिजली ही मिल रही, जबकि बिहार की हालिया दिनों में खपत प्रतिदिन 5600 मेगावाट तक है.

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राजस्थान में एसी कम चलाने की अपील
बिजली संकट के बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लोगों से एयरकंडीशन कम चलाने और बिजली की बचत करने की अपील तक करनी पड़ी है. यही नहीं, उन्होंने अधिकारियों से बिजली की बचत के लिए लोगों को जागरूक करने की बात भी कही है. उन्होंने सरकारी विभागों में जरूरत नहीं होने पर बिजली के उपकरणों को बंद रखने के निर्देश दिए हैं. इस लिहाज से देखें तो देश के कई राज्य बिजली संकट से जूझ रहे हैं और आने वाले समय में भी इससे निजात पाने की सूरत नजर नहीं आ रही है. 

First Published : 09 Oct 2021, 01:56:13 PM

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