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काराकोरम तक पहुंचने किए चीन बना रहा नई सड़क,  भारत के लिए बढ़ गई टेंशन

सैटेलाइट तस्वीरों और सर्विलांस डेटा से चीन के नए ठिकाने बनाने की जानकारी मिली है. चीन भले ही भारत से तनाव कम करने की बात कर रहा हो लेकिन उसकी तैयारी दिखा रही है वह इलाके में लगातार तनाव बनाए रखना चाहता है.

News Nation Bureau | Edited By : Kuldeep Singh | Updated on: 19 Dec 2020, 08:43:22 AM
Karakoram Road

काराकोरम तक पहुंचने किए चीन बना रहा नई सड़क,  भारत के लिए बढ़ गई टेंशन (Photo Credit: प्रतीकात्मक फोटो)

लद्दाख:

लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल  (LAC) पर चीन अपने इंफ्रास्ट्रक्टर को लगातार मजबूत कर रहा है. सीमा से लगे इलाकों में अपनी रणनीतिक बढ़त बनाने के लिए पिछले कई सालों से वह सड़क का जाल बिछा रहा है. हाल में सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों और 3,488 किलोमीटर लंबे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर कॉम्युनिकेशन इंटरसेप्ट्स के जरिए पता चला है कि चीन की पीपल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) भारत के खिलाफ क्षमात बढ़ाने के लिए अक्साई चिन और काराकोरम पास में एक अहम सड़क का निर्माण और सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास कर रही है. 

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चीन बना रहा नए ठिकाने
सैटेलाइट तस्वीरों और सर्विलांस डेटा से चीन के नए ठिकाने बनाने की जानकारी मिली है. चीन भले ही भारत से तनाव कम करने की बात कर रहा हो लेकिन उसकी तैयारी दिखा रही है वह इलाके में लगातार तनाव बनाए रखना चाहता है. चीन इलाके से सैनिकों और उपकरणों को हटाने को तैयार नहीं है. हालांकि, ताजा घटनाक्रमों को लेकर सरकार ने कुछ नहीं कहा है, लेकिन लद्दाख में 597 किलोमीटर लंबी एलएसी पर सैनिकों के टेंट और सैन्य वाहनों की संख्या बढ़ गई है. सैनिकों के नए ठिकानों से संकेत मिल रहा है कि पीएलए यहां भारतीय सेना के साथ लंबे समय तक उलझने की तैयारी में है.

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सड़क बनने से चीन को रणनीतिक रूप से मिलेगी बढ़त 
जिस इलाके में चीन सड़क बना रहा है वह काराकोरम से होती हुई दौलत बेग ओल्डी तक पहुंचती है. भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, गंभीर चिंता का विषय है है कि चीन ने 8-10 मीटर चौड़ी एक वैकल्पिक सड़क का निर्माण काराकोरम पास तक कर लिया है, जिससे दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में स्ट्रैटिजिक गेटवे तक पहुंचने में दो घंटे कम लगेंगे. पिछले इलाकों में चीन ने इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण गतिविधियों को तेज कर दिया है। गोलमुंड में एक भूमिगत पेट्रोलियम और ऑइल स्टोरेज फैसिलिटी का निर्माण किया जा रहा है. यह डिपो एलएसी से हजार किलोमीटर दूर है, लेकिन तिब्बत रेलवे के जरिए ल्हासा से जुड़ा हुआ है.  

First Published : 19 Dec 2020, 08:43:22 AM

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