डिमेंशिया और पार्किंसंस से जूझ रहे थे मुकुल रॉय, जानें इन बीमारियों के शुरुआती लक्षण और इलाज

Mukul Roy Passes Away: पूर्व रेल मंत्री और टीएमसी नेता मुकुल रॉय का 71 साल की आयु में निधन हो गया. वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें डिमेंशिया और पार्किंसंस था. आइए जानते हैं इन बीमारियों के लक्षणों के बारे में विस्तार से.

Mukul Roy Passes Away: पूर्व रेल मंत्री और टीएमसी नेता मुकुल रॉय का 71 साल की आयु में निधन हो गया. वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें डिमेंशिया और पार्किंसंस था. आइए जानते हैं इन बीमारियों के लक्षणों के बारे में विस्तार से.

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Namrata Mohanty
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mukul roy Photograph: (ANI)

Mukul Roy Passes Away: देश के पूर्व रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता मुकुल रॉय का निधन हो गया है. खबर के मुताबिक, उन्होंने रविवार देर रात 1 बजकर 30 मिनट पर अंतिम सांस ली. बताया जा रहा है कि उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ था जबकि मुकुल पिछले 20 महीनों से अस्पताल में भर्ती थे. वे लंबे समय से बीमार थे. उन्हें डिमेंशिया और पार्किंसंस जैसे रोग भी थे. उनकी मौत कोलकाता के अपोलो अस्पताल में हुई, जिसकी जानकारी खुद उनके बेटे ने कंफर्म की है. क्या है पार्किंसंस और डिमेंशिया डिजीज.

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क्या हैं ये बीमारियां?

बता दें कि हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुकाबले, ये दोनों रोग मनोभ्रंश के हैं. यानी इनका संबंध मानसिक स्थिति से होता है. इन रोगों में लक्षण भी एक जैसे देखने को मिलते हैं. मगर बावजूद उसके दोनों रोग एक-दूसरे से अलग है. इसमें मस्तिष्क की कोशिकाएं प्रभावित होती है.

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पार्किंसंस क्या है?

पार्किंसंस एक धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है, जो न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जो मुख्य रूप से हमारे शरीर की गति को प्रभावित करती है. इसके शुरुआती लक्षण हाथों या उंगलियों में हल्की कंपकंपी होना, शरीर में जकड़न, चलने में धीमापन, संतुलन बिगड़ना और लिखावट का छोटा और अस्पष्ट होना होता है. ये बीमारी मुख्य तौर पर उम्र बढ़ने पर होने लगती है.

क्या है डिमेंशिया?

डिमेंशिया रोग पूरी तरह दिमागी बीमारी होती है, जो दिमाग की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं बल्कि कई सारे लक्षणों का समूह होता है, जिसमें याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता कम होना और निर्णय लेने की शक्ति धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है. यह बीमारी भी अधिकतर 65 वर्ष के बाद होती है. 

इसके लक्षण कैसे होते हैं?

  • बार-बार चीजें भूलना.
  • रोजमर्रा के कामों में दिक्कत आना.
  • बात करते समय शब्द भूल जाना.
  • मूड और व्यवहार में बदलाव.
  • एक ही सवाल को बार-बार पूछना.

क्या है सही इलाज?

हालांकि, इन दोनों बीमारियों का पूरी तरह इलाज करना संभव नहीं है, लेकिन दवाओं, थेरेपी और लाइफस्टाइल में बदलाव करने से इनके प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. साथ ही खान-पान में बदलाव और शराब तथा धूम्रपान करने से भी बचना चाहिए.

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