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गुरूग्राम प्रॉपटी Photograph: (ANI)
हरियाणा के गुरुग्राम में काम करने वाले एक टेक प्रोफेशनल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर अपनी निराशा साझा करते हुए कहा कि सालाना लगभग 1 करोड़ रुपये की संयुक्त आय होने के बावजूद शहर में एक “ढंग का” घर खरीदना संभव नहीं हो पा रहा है. पोस्ट के बाद गुरुग्राम के रियल एस्टेट बाजार को लेकर तीखी बहस छिड़ गई.
1.7 करोड़ के बजट में भी नहीं मिला घर
टेकी के अनुसार, वह और उनकी पत्नी दोनों अच्छी कमाई करते हैं और उनके पास पर्याप्त बचत भी है. इसके बावजूद उन्होंने बताया कि 1.5 करोड़ रुपये का बजट तय करने और उसे बढ़ाकर 1.7 करोड़ रुपये तक ले जाने के बाद भी महीनों की खोज में उन्हें कोई ऐसा घर नहीं मिला जो कीमत के हिसाब से संतोषजनक लगे.
क्वालिटी भी बड़ी समस्या
पोस्ट में नाराजगी सिर्फ महंगे दामों को लेकर नहीं थी, बल्कि निर्माण गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए गए. टेक प्रोफेशनल ने खराब कंस्ट्रक्शन, कमजोर सड़कों, बरसात में जलभराव और गंभीर वायु प्रदूषण का जिक्र किया. उन्होंने लिखा कि जब बुनियादी सुविधाएं ही कमजोर हैं तो घरों की कीमतें इतनी ज्यादा क्यों हैं.
अन्य शहरों से तुलना
यूजर ने गुरुग्राम की तुलना पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों से की. उनका कहना था कि इन शहरों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और रहने की स्थिति कम कीमत पर मिल जाती है, जबकि गुरुग्राम में कोई भी बिल्डर भरोसे लायक नहीं लगता.
यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कुछ यूजर्स ने कहा कि यह बाजार की हकीकत है और इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं लेना चाहिए. एक यूजर ने लिखा कि अलग-अलग शहरों में आय और प्रॉपर्टी की क्रय शक्ति अलग होती है. वहीं, कुछ ने महंगाई और तेजी से बढ़ती सैलरी को भी प्रॉपर्टी दाम बढ़ने की वजह बताया.
लोगों ने दिया सुझाव
कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास 60–75 लाख रुपये में किफायती घर मिल सकते हैं. अन्य ने पास के शहरों जैसे फरीदाबाद और भिवाड़ी में निवेश की सलाह दी, जहां अपेक्षाकृत कम कीमत पर बड़े घर उपलब्ध हैं. कुछ यूजर्स ने छोटे फ्लैट खरीदकर किराये से आय का विकल्प भी सुझाया.
शहर छोड़ने की सोच
टेक प्रोफेशनल ने अंत में कहा कि अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो कई आईटी प्रोफेशनल्स गुरुग्राम छोड़कर अन्य शहरों की ओर रुख कर सकते हैं. उन्होंने माना कि वे खुद भी भविष्य में ऐसा करने पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि मौजूदा बाजार उन्हें “बिल्कुल वैल्यू फॉर मनी” नहीं लगता..
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