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हैदराबाद न्यूज Photograph: (X/ani)
भारत के बड़े शहरों में नौकरी करने वाले लोग अक्सर यह बहस करते हैं कि रहने के लिए कौन सा शहर सबसे अच्छा है. इस बहस में अब डेलॉयट (Deloitte) की एक अनुभवी मैनेजर ने अपनी राय रखी है, जो काफी चर्चा में है. कोमल झा, जो डेलॉयट कंसल्टिंग में एंगेजमेंट मैनेजर के तौर पर काम करती हैं, उन्होंने हैदराबाद को रहने के लिए भारत का सबसे बेहतरीन शहर बताया है. कोमल के पास कॉरपोरेट जगत का 11 साल से ज्यादा का अनुभव है और उन्होंने देश के लगभग सभी बड़े महानगरों यानी टियर-1 शहरों में काम किया है. दिल्ली, मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों में रहने के बाद अब उन्होंने हैदराबाद को अपना घर बनाया है.
हैदराबाद ही क्यों है सबसे खास?
कोमल झा मूल रूप से बिहार के भागलपुर की रहने वाली हैं, लेकिन पिछले 9 साल से वह हैदराबाद में रह रही हैं. उनका कहना है कि हर शहर की अपनी खूबियां और खामियां होती हैं, लेकिन जब बात 'क्वालिटी ऑफ लाइफ' यानी जीवन की गुणवत्ता की आती है, तो हैदराबाद का पलड़ा भारी लगता है. उन्होंने एचटी डॉट कॉम को बताया कि अन्य शहरों के मुकाबले हैदराबाद में उन्हें एक संतुलित जीवन जीने का मौका मिलता है, जो एक वर्किंग प्रोफेशनल के लिए बहुत जरूरी है. वे अपने पति और बेटी के साथ एक 3 बीएचके (3BHK) घर में रहती हैं.
हर महीने का भारी-भरकम बजट
हैदराबाद में एक आरामदायक जीवन जीने के लिए कोमल को हर महीने एक बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है. उनके मासिक बजट का सबसे बड़ा हिस्सा घर के किराये में जाता है. कोमल हर महीने सिर्फ किराये के तौर पर 50,000 रुपये चुकाती हैं. यह रकम किसी भी आम आदमी के लिए बहुत ज्यादा हो सकती है, लेकिन एक प्रीमियम लाइफस्टाइल के लिए यह जरूरी हो जाता है. इसके बाद घर को संभालने के लिए घरेलू मदद (डोमेस्टिक सपोर्ट) पर भी उनका अच्छा-खासा खर्च होता है.
मेड और बच्चों की पढ़ाई का खर्च
कोमल के बजट में घरेलू सहायिका यानी मेड का खर्च भी काफी ज्यादा है. वे अपनी मेड को हर महीने 20,000 रुपये देती हैं, जो कई छोटे शहरों में लोगों की पूरी सैलरी होती है. इसके अलावा, बिजली और अन्य यूटिलिटीज (Utilities) का बिल करीब 10,000 रुपये महीना आता है. यानी सिर्फ घर चलाने और रखरखाव में ही उनकी अच्छी खासी कमाई खर्च हो जाती है. बच्चों की परवरिश और शिक्षा किसी भी माता-पिता के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है. कोमल भी अपनी बेटी की शिक्षा पर हर महीने 30,000 रुपये खर्च करती हैं. इसके अलावा, राशन और किचन के सामान (ग्रोसरी) पर उनका मासिक खर्च लगभग 15,000 रुपये है. इन आंकड़ों को जोड़कर देखा जाए तो पता चलता है कि एक बड़े शहर में सीनियर पोजीशन पर काम करने वाले व्यक्ति का खर्च किस स्तर का होता है.
कोमल ने और क्या क्या बताया?
अपने करियर के बारे में बात करते हुए कोमल ने बताया कि डेलॉयट में उनकी भूमिका काफी अहम है. 11 साल के अनुभव के साथ, वह बड़े पैमाने पर हेल्थकेयर क्लाइंट्स के लिए काम संभालती हैं. उनका काम क्लाइंट डिलीवरी, प्रोग्राम गवर्नेंस और ऑपरेशनल रोडमैप तैयार करना है. इसमें लोगों का प्रबंधन, रिसोर्स प्लानिंग और प्रोजेक्ट्स को सही तरीके से पूरा करना शामिल है. इतनी बड़ी जिम्मेदारियों और शहर के महंगे खर्चों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं है, लेकिन कोमल मानती हैं कि हैदराबाद उन्हें वह सुकून देता है जो अन्य शहरों में शायद मुश्किल है.
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