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दिल्ली हाईकोर्ट के नोटिस को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अधिकारियों को जेल में डालने से कुछ हासिल नहीं होगा

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अदालत की अवमानना के आरोप में अधिकारियों को जेल में डालने से अंततः कुछ हासिल नहीं होगा. ये मुश्किल वक्त है, लोगों की जिंदगी दांव पर है और सभी का सहयोग जरूरी है.

Written By : अरविंद सिंह | Edited By : Dalchand Kumar | Updated on: 05 May 2021, 02:58:38 PM
supreme court

HC के नोटिस को चुनौती, SC ने कहा- अफसरों को जेल भेजने से कुछ नहीं होगा (Photo Credit: फाइल फोटो)

highlights

  • दिल्ली हाईकोर्ट के अवमानना नोटिस को चुनौती
  • नोटिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची केंद्र सरकार
  • हाईकोर्ट ने केंद्र के अधिकारियों को भेजा है नोटिस

नई दिल्ली:

दिल्ली हाईकोर्ट के अवमानना नोटिस के खिलाफ केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. दिल्ली में ऑक्सीजन की मांग के मुताबिक सप्लाई न होने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया है, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. केंद्र सरकार की अर्जी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अदालत की अवमानना के आरोप में अधिकारियों को जेल में डालने से अंततः कुछ हासिल नहीं होगा. ये मुश्किल वक्त है, लोगों की जिंदगी दांव पर है और सभी का सहयोग जरूरी है.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता ये राष्ट्रीय आपदा है और केंद्र सरकार कुछ भी नहीं कर रही है, ऐसा भी नहीं है. जस्टिस शाह ने कहा कि अगर आप दूसरे राज्यों की ऑक्सीजन को दिल्ली डायवर्ट करते हैं तो वहां पर भी जरूरत होगी सवाल यह है कि आखिर आपके पास ऑक्सीजन वितरण का क्या प्लान है. कोर्ट के सवाल पर केंद्र सरकार की ओर से SG तुषार मेहता ने कहा कि अस्पतालों में ऑक्सीजन की मांग को देखते हुए इंडस्ट्रीज में हो रही ऑक्सीजन को मरीजों कर लिए डायवर्ट किया है. तुषार मेहता ने कोर्ट को वो फॉर्मूला बताया, जिससे राज्यों की ऑक्सीजन मांग पर फैसला होता है.

तुषार मेहता ने कहा कि इस फॉर्मूले के लिहाज से दिल्ली की 700 मेट्रिक टन रोज ऑक्सीजन की मांग जायज नहीं है. इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि हम समझते हैं कि अलग-अलग राज्य में बीमारी की स्थिति में अंतर हो सकता है. अलग अलग राज्यों में बीमारी का पीक अलग अलग वक्त में हो सकता है, इसलिए कोई एक सामान्य आकलन नहीं हो सकता. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि दिल्ली की स्थिति वाकई बहुत खराब है. आप बताइए कि 2 मई की रात हमारा आदेश आने के बाद से आपने दिल्ली को कितना ऑक्सीजन दिया. इस पर तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि 3 मई को 483 मीट्रिक टन, 4 मई को 585 मीट्रिक टन ऑक्सीजन दिल्ली को दी गई, जबकि आज यानी 5 मई का आंकड़ा अभी अपडेट हो रहा है.

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इसके बाद जस्टिस चंद्रचूड़ ने सवाल किया कि हम जानना चाहते हैं कि दिल्ली को दिए गए सप्लायर्स की वास्तविक सामर्थ्य क्या है? क्या वाकई वह सप्लायर दिल्ली में मांग के मुताबिक ऑक्सीजन सप्लाई करने की स्थिति में है. लोग बहुत परेशान है. दिल्ली में टैंकरों के जरिए कितनी ऑक्सीजन पहुंच रही है, इसकी जानकारी लोगों और अस्पतालों को मिलनी चाहिए. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक एक्सपर्ट पैनल बनाने का सुझाव भी दिया. कोर्ट ने कहा कि एक्सपर्ट पैनल बनाया जा सकता है, जो कि ऑक्सीजन की वितरण में सहायक साबित हो.

कोर्ट ने इस दौरान बीएमसी (मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन) के कोरोना को लेकर उठाए कदमों की तारीफ की. कोर्ट ने कहा कि इस सिलसिले में मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने बेहतरीन काम किया है. हमें उनसे सीखना चाहिए. इसके बाद SG  तुषार मेहता ने कहा कि मुंबई में 10 अप्रैल को  92000 एक्टिव केस का लोड था. ऐसी स्थिति अब दिल्ली में भी है. हालांकि मुंबई में ऑक्सीजन की कुल खपत दिल्ली के मुकाबले कम थी, लेकिन मैं फिर भी इस बात को नहीं कह रहा हूं कि दिल्ली में ऑक्सीजन की जरूरत नहीं है. हमने मुंबई से आग्रह किया है कि वह अपने मॉडल को भेजें, ताकि दूसरे राज्य में भी लागू किया जा सके.

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केंद्र सरकार की ओर से दलील रखते हुए तुषार मेहता ने कहा कि दिल्ली अब 970 मेट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग कर रहा है. इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि ऑक्सीजन की इमरजेंसी स्टॉक रखने का आदेश देने के पीछे हमारा मकसद यही था. अगर मुंबई इस तरह के प्लांट हो सकते हैं तो दिल्ली में क्यों नहीं. कोर्ट ने कहा कि बेहतर होगा कि दिल्ली और केंद्र सरकार के हेल्थ सेक्रेटरी, मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के साथ मीटिंग करें और उनके अनुभव के आधार पर यह तय किया जाए कि आखिर दिल्ली में स्टोरेज टैंक और इसे इंस्टॉल करने के लिए क्या कुछ प्लान है. ये कवायद आज से शुरू की जा सकती है. 

जस्टिस चंद्रचूड़ ने केंद्र सरकार से कहा कि आप हमें बताएं कि दिल्ली को आज कितनी ऑक्सीजन की सप्लाई होने वाली है. इस पर ASG ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि 12 बजे तक 351 मेट्रिक टन ऑक्सीजन दिल्ली को पहुंच गई है. फिर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि बीएमसी ने जो कुछ किया है, अगर वह तरीका दिल्ली में इस्तेमाल किया जाए तो बेहतर होगा. हमारी जिम्मेदारी दिल्ली के लोगों के प्रति है और यह सोचना होगा कि यहां पर 700 मेट्रिक टंकी ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि कृपया रिलैक्स कीजिए. अधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई का हमारा कोई इरादा नहीं. हमें पता है कि अधिकारी दिन रात काम कर रहे हैं.

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इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने SG तुषार मेहता की इस दलील को ठुकरा दिया कि दिल्ली में 500 मेट्रिक टन ऑक्सीजन पर्याप्त रहेगी. SG का कहना था कि ऑक्सीजन असीमित नहीं है, तार्किक इस्तेमाल जरूरी है. इस पर कोर्ट ने कहा कि हमें ऐसा नहीं लगता हम स्थिति को देख रहे हैं. ये भी जान रहे हैं कि 500 मेट्रिक टन ऑक्सीजन से आखिर क्या फायदा हो रहा है. हम दिल्ली के लोगों के प्रति जवाबदेह है. SG तुषार मेहता ने कहा कि मेरा सुझाव है कि कुछ निष्पक्ष विशेषज्ञ की एक कमिटी बना दी जाए, इसमें केंद्र और दिल्ली के कुछ अधिकारी भी हों. एम्स के डॉक्टर गुलेरिया और प्राइवेट हॉस्पिटल से भी. ये कमिटी देखे कि ऑक्सीजन की सप्लाई में कहां दिक्कत आ रही है.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि मेरे साथी जज जस्टिस एमआर शाह का कहना है कि वह कल से मेरे साथ नहीं बैठ पाएंगे, क्योंकि उन्हें अपने 90 साल के बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करनी है. जस्टिस शाह ने कहा कि मेरी पहली प्राथमिकता मेरा देश है. मैं यहां पर पूरी गर्मी की छुट्टियों के दौरान भी सुनवाई के लिए उपलब्ध रह सकता हूं. इसके बाद जस्टिस चंद्रचूड़ ने आदेश लिखवाना शुरू कियाय. HC के आदेश और यहां रखी दलीलों को रिकॉर्ड पर लिया गया. बाद में कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई से ऑक्सीजन की किल्लत दूर नहीं होने वाली. ये मानवीय संकट है. ध्यान समस्या के समाधान पर होना चाहिए.

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हम दिल्ली के हालात से बेखबर नहीं है. लिहाजा हमने यहां केन्द्र को 700 मेट्रिक टन ऑक्सीजन सप्लाई सुनिश्चित करने को कहा था. केंद्र अभी बेड की संख्या के लिहाज से, फॉर्मूला के आधार पर राज्यों को ऑक्सीजन आवंटित कर रहा है. हमारा मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों के मुताबिक इस फॉर्मूले पर फिर से विचार हो. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में आगे कहा कि हम SG तुषार मेहता के इस सुझाव से समहत है कि कुछ निष्पक्ष विशेषज्ञ की एक कमिटी बना दी जाए. इसमें केंद्र और दिल्ली के कुछ अधिकारी भी हों. ये कमिटी देखे कि ऑक्सीजन की सप्लाई में क्या दिक्कत आ रही है?  

कोर्ट ने आदेश दिया कि केंद्र और दिल्ली के अधिकारी अगले 3 दिन में मुंबई म्युनिसिपल के अधिकारियों से बात करें. इससे प्राप्त अनुभव से दिल्ली में आक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाएं. हमें अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई का कोई औचित्य नज़र नहीं आता, पर केंद्र सरकार हमारे सामने विस्तृत प्लान पेश करे कि आखिर दिल्ली को 700 मेट्रिक टन ऑक्सीजन सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए क्या प्लान है. इसमें सप्लाई के सोर्स, ट्रांसपोर्ट का तरीका का जिक्र हो. कल तक केंद्र सरकार ये प्लान पेश करे.

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First Published : 05 May 2021, 02:32:28 PM

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