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Paro Pinaki Ki Kahani Review Photograph: (Paro Pinaki Ki Kahani Review)
Paro Pinaki Ki Kahani Review: पारो पिनाकी की कहानी एक 90 मिनट की फिल्म है, जो पहली नजर में दर्शकों को एक सिंपल लव स्टोरी लगती है. मगर जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है तो ये समाज की कई कड़वी सच्चाइयों से आपको रूबरू करवाएगी. चलिए जानते हैं इस फिल्म के बारे में.
ऐसी है कहानी
यह फिल्म कोई टिपिकल बॉलीवुड रोमांटिक फिल्म नहीं है. इसमें ज्यादा ड्रामा, बड़े-बड़े डायलॉग या ग्लैमर नहीं है बल्कि ये फिल्म एक सीवर साफ करने वाले लड़के और एक सब्जी बेचने वाली लड़की की कहानी है, जो बिल्कुल जमीनी हकीकत से जुड़ी हुई है.
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कैसी है फिल्म?
इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यही है कि ये प्यार को सिर्फ दिखाती नहीं बल्कि ये भी बताती है कि प्यार को निभाया कैसे जाता है. बिना किसी किसिंग सीन और बिना ओवरड्रामा के भी यह फिल्म बेहद सादगी से भरी एक खूबसूरत प्रेम कहानी बुनती है.
डायरेक्शन
रुद्र जादौन ने इस फिल्म की कहानी को लिखा है और डायरेक्ट भी किया है. उन्होंने जिस सादगी और सच्चाई के साथ कहानी को परोसा है, वो काबिल-ए तारीफ है. फिल्म के कई सीन और डायलॉग ऐसे हैं, जो आपको इमोशनल कर देते हैं और सोचने पर मजबूर कर देते हैं. एक सीन में जब सीवर साफ करने वाला किरदार बड़ी सहजता से कहता है कि उनकी जिंदगी करीब 40 साल के आसपास ही खत्म हो जाती है, क्योंकि नाली साफ करते-करते उनकी बॉडी पूरी तरह खराब हो जाती है. ये बात सीधे दिल पर लगती है. जिस सामान्य अंदाज में इस गंभीर सच्चाई को दिखाया गया है, वही इस सीन को और भी असरदार बना देता है.
गंभीर मुद्दे उठाती है फिल्म
इस खूबसूरत प्रेम कहानी के जरिए फिल्म मानव तस्करी जैसे गंभीर मुद्दे को भी उजागर करती है. फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे कई जगहों पर लड़कियों को सिर्फ चंद हजार रुपयों में बेच दिया जाता है, वो भी अपने ही घरवालों द्वारा ही. देश के कई हिस्सों में लड़कियों की कमी की वजह से उन्हें शादी के लिए खरीदा और बेचा जाता है. इस मुद्दे को फिल्म में बिना किसी बनावट के खुलकर दिखाया गया है. इसके साथ-साथ फिल्म बेरोजगारी, जातिवाद, गरीबी और शिक्षा जैसे सामाजिक मुद्दों को भी छूती है, जो कहानी को और गहराई देती हैं.
कौन-कौन हैं फिल्म के एक्टर्स?
एक्टिंग की बात करें तो फिल्म में लीडर संजय सिंह की बेटी ईशिता सिंह ने कमाल की एक्टिंग की है. उन्होंने अपने किरदार को बेहद सादगी और सच्चाई के साथ निभाया है. स्क्रीन पर उनकी परफॉर्मेंस बनावटी नहीं लगती बल्कि पूरी तरह से किरदार में ढली हुई नजर आती है.
वहीं, संजय बिसनोई, जो सीवर साफ करने वाले का रोल निभा रहे हैं, उन्होंने अपने अभिनय से दिल जीत लिया है. जब लोग उन्हें सिर्फ बदबू की वजह से काम देने से मना कर देते हैं और जिस तरह वो उस बदबू से छुटकारा पाने की कोशिश करते हैं, वो सीन लंबे समय तक दिमाग में रहता है. उनका अभिनय बेहद असरदार है.
फाइनल वर्डिक्ट
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि Paro Pinaki Ki Kahani एक ऐसी फिल्म है, जो समाज के कड़वे सच को सामने लाती है, जिनसे कहीं न कहीं हम रोज रूबरू होते हैं लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं. ये फिल्म सिर्फ एंटरटेन नहीं करती है बल्कि दर्शकों को एक रियलिटी चेक भी देती है.
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