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राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वालों को बड़ी राहत, सिर्फ 15 मिनट में मिलेंगी इमरजेंसी सेवाएं

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रीय राजमार्गों के ऊपर लोगों को अब हेल्पलाइन नंबर (Helpline) 1033 पर एक कॉल करना होगा. सिर्फ एक कॉल करने पर 15 मिनट के भीतर सफर करने वालों को पेट्रोलिंग वाहन, एंबुलेंस सेवा और क्रेन की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी.

News Nation Bureau | Edited By : Dhirendra Kumar | Updated on: 11 Feb 2021, 10:23:44 AM
राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highway)

राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highway) (Photo Credit: newsnation)

highlights

  • इमरजेंसी सेवाओं को राष्ट्रीय राजमार्गों पर 24 घंटे सातों दिन शुरू करने जा रही है मोदी सरकार 
  • राष्ट्रीय राजमार्गों पर आपातकालीन सेवाओं के लिए हेल्पलाइन नंबर 1033 पर एक कॉल करना होगा

नई दिल्ली :

अगर आप राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highway) पर सफर करते रहते हैं तो यह खबर आपको काफी राहत देने वाली हो सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र की नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार इमरजेंसी सेवाओं (Emergency Services) को राष्ट्रीय राजमार्गों पर 24 घंटे सातों दिन शुरू करने जा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर कर रहे लोगों को आपातकालीन सेवाओं के लिए अब हेल्पलाइन नंबर (Helpline) 1033 पर एक कॉल करना होगा. सिर्फ एक कॉल करने पर 15 मिनट के भीतर सफर करने वालों को पेट्रोलिंग वाहन, एंबुलेंस सेवा और क्रेन की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी. केंद्र सरकार ने इसकी जवाबदेही टोल टैक्स-निर्माण कंपनियों और ठेकेदारों पर तय की है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लोगों तक सही समय पर मदद नहीं मिलने की स्थिति में कंपनियों के ऊपर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लग सकता है. 

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9 फरवरी 2021 से नई व्यवस्था लागू करने के आदेश
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की मंजूरी मिलने के बाद राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों को 9 फरवरी 2021 से नई व्यवस्था लागू करने के आदेश दे दिए गए हैं. नई व्यवस्था के लिए एसओपी भी जारी हो चुकी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आदेश के अनुसार एंबुलेंस और क्षतिग्रस्त वाहन हटाने के लिए क्रेन का लगने वाला समय 30 मिनट तय किया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नए नियम को पालन के लिए कंपनियों को नियंत्रण-मोबाइल ऑपरेटर केंद्र बनाना होगा. इसके अलावा एंबुलेंस का रंग नीला और पेट्रोलिंग केंद्र भी बनाना होगा. राजमार्गों के किनारे 20 से 60 किलोमीटर पर कंपनियों को एंबुलेंस, क्रेन और पेट्रोलिंग वाहनों की तैनाती भी करनी जरूरी होगी.

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हाईवे पर हादसा होते ही एंबुलेंस को हो जाएगी खबर
सड़क हादसा होते ही तुरंत घायलों को इलाज मिले, इसके लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय एक अहम योजना पर काम कर रहा है. ऐसी तकनीकी व्यवस्था करने की तैयारी है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क हादसा होते ही तुरंत एंबुलेंस और पुलिस को खबर हो जाएगी. जीपीएस सिस्टम से लैस एंबुलेंस की व्यवस्था होगी. इसी तरह सड़क हादसों को रोकने की दिशा में भी मंत्रालय कई नई योजनाओं पर भी कार्य कर रहा है. देश भर के आईआईटी, एनआईटी जैसे इंजीनियरिंग संस्थानों के साथ मिलकर सड़क हादसे को रोकने की कार्ययोजना पर भी काम चल रहा है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव गिरिधर अरमने ने एक सवाल के जवाब में बताया कि रोड सेफ्टी की दिशा में इमरजेंसी रेस्पांस मैकेनिज्म पर काम चल रहा है. एंबुलेंस, पुलिस कंट्रोल रूम, हास्पिटल सभी के एक नेटवर्क से जुड़ने से सड़क हादसे के शिकार लोगों को तुरंत इलाज मिलना संभव होगा और राहत एवं बचाव कार्य में भी सुविधा होगी. हादसा होते ही रियल टाइम इंफार्मेशन मिलेगी. कुछ ही समय में सड़क हादसे के शिकार लोगों के लिए कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम भी शुरू होगी. इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय से भी बात चल रही है.

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First Published : 11 Feb 2021, 10:23:44 AM

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