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डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन Photograph: (Grok AI image)
अटलांटिक महासागर में पिछले दो हफ्तों से जारी एक हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद, अमेरिका अब वेनेजुएला से जुड़े एक तेल टैंकर को जब्त करने की तैयारी में है. इस ऑपरेशन ने न केवल वेनेजुएला पर अमेरिकी दबाव को बढ़ा दिया है, बल्कि रूस के साथ सीधे सैन्य और कूटनीतिक टकराव की स्थिति भी पैदा कर दी है.
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 'बेला-1' (Bella-1) नामक टैंकर से शुरू हुआ, जिसे वेनेजुएला के तेल निर्यात पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के लिए जाना जाता है. अमेरिकी तटरक्षक बल (US Coast Guard) ने कई बार इस जहाज पर चढ़ने की कोशिश की, लेकिन टैंकर ने इन कोशिशों को नाकाम कर दिया और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र की ओर निकल गया.
सफर के दौरान इस जहाज ने अपनी पहचान छिपाने के लिए अपना नाम बदलकर 'मैरिनेरा' (Marinera) रख लिया और रूसी ध्वज (Russian Registry) के तहत अपना पंजीकरण करा लिया. जहाज का रूस के साथ यह जुड़ाव अब इस पूरे मामले को एक गंभीर भू-राजनीतिक संकट में बदल गया है.
रूस की भूमिका बढ़ते ही अमेरिका परेशान
टैंकर का रूसी झंडे के नीचे आना अमेरिका के लिए चुनौती बन गया है. अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, किसी देश के झंडे वाले जहाज को जब्त करना उस देश की संप्रभुता को चुनौती देने जैसा माना जाता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ऑपरेशन के दौरान क्षेत्र में रूसी पनडुब्बी सहित अन्य नौसैनिक संपत्तियां देखी गई हैं, जिससे समुद्र में सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई है. रूस ने पहले ही चेतावनी दी है कि वह अपने ध्वज के नीचे चलने वाले जहाजों के खिलाफ किसी भी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा. मॉस्को ने अमेरिकी प्रतिबंधों को अवैध बताते हुए इसे 'वॉशिंगटन की दादागिरी' करार दिया है.
ट्रम्प प्रशासन की सख्त नीति
यह कार्रवाई डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत निकोलस मादुरो सरकार की आय के स्रोतों को पूरी तरह बंद करने की कोशिश की जा रही है. अमेरिका का आरोप है कि वेनेजुएला अपने तेल निर्यात से मिलने वाले धन का उपयोग भ्रष्टाचार और दमन के लिए कर रहा है.
'शैडो फ्लीट' पर अमेरिका की नजर
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, मैरिनेरा जैसे जहाज 'शैडो फ्लीट' (Shadow Fleet) का हिस्सा हैं. ये ऐसे टैंकर होते हैं जो प्रतिबंधों से बचने के लिए लगातार अपने नाम, झंडे और मालिकाना हक बदलते रहते हैं. वॉशिंगटन का तर्क है कि ये जहाज न केवल अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करते हैं, बल्कि समुद्री सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा हैं.
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