US-Israel Attack: ईरान में मची तबाही, स्कूल पर हुए धमाके के बाद 85 छात्रों की मौत

US-Israel Attack: ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के हवाले से सामने आई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दक्षिणी प्रांत होर्मोज़गान के मिनाब शहर में एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हवाई हमले में 85 छात्राओं की मौत हो गई.

US-Israel Attack: ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के हवाले से सामने आई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दक्षिणी प्रांत होर्मोज़गान के मिनाब शहर में एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हवाई हमले में 85 छात्राओं की मौत हो गई.

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Dheeraj Sharma
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US-Israel Attack: ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के हवाले से सामने आई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दक्षिणी प्रांत होर्मोज़गान के मिनाब शहर में एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हवाई हमले में 85 छात्राओं की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि यह हमला हालिया सैन्य अभियान के दौरान हुआ, जिसमें अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई का आरोप लगाया गया है. हालांकि इस घटना की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है.

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स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, हमले के समय स्कूल में कक्षाएं चल रही थीं. विस्फोट के बाद इमारत का एक हिस्सा ध्वस्त हो गया और राहत-बचाव दलों को मलबा हटाने में कई घंटे लग गए. घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.

सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का बयान

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि अमेरिका ने “जियोनिस्ट शासन” के साथ मिलकर देश के कई हिस्सों में हवाई हमले किए. परिषद ने आरोप लगाया कि दुश्मन को उम्मीद थी कि इन कार्रवाइयों से ईरानी जनता पर मनोवैज्ञानिक दबाव पड़ेगा, लेकिन ऐसा नहीं होगा. बयान में कहा गया कि इस्लामिक रिपब्लिक की सशस्त्र सेनाओं ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है.

सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कर दी गई है और घबराने की जरूरत नहीं है.

एहतियाती कदम: स्कूल बंद, दफ्तर आधी क्षमता से

स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने अगली सूचना तक स्कूलों और विश्वविद्यालयों को बंद रखने का फैसला किया है. बैंकिंग सेवाएं जारी रहेंगी, जबकि सरकारी कार्यालय फिलहाल 50 प्रतिशत स्टाफ के साथ काम करेंगे. सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया है और संवेदनशील ठिकानों की निगरानी बढ़ा दी गई है.

विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया: “हम युद्ध नहीं चाहते थे”

ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश ने संभावित सैन्य खतरे के बावजूद संवाद का रास्ता चुना था ताकि तनाव को कम किया जा सके. मंत्रालय के अनुसार, ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ संपर्क बनाए रखा और बातचीत के जरिए समाधान की कोशिश की.

बयान में कहा गया कि मौजूदा हालात में देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना अनिवार्य हो गया है. मंत्रालय ने दोहराया कि ईरान युद्ध की पहल नहीं चाहता था, लेकिन अगर उस पर हमला किया जाता है तो उसकी सशस्त्र सेनाएं कड़ा और निर्णायक जवाब देने में सक्षम हैं.

क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर टिकी है कि हालात आगे किस दिशा में बढ़ते हैं और क्या कूटनीतिक प्रयास फिर से शुरू हो पाते हैं.

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