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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची Photograph: (X@IraninJapan)
US-Iran War: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग जारी है. इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अघारची ने एक बार फिर से कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत का सवाल ही नहीं उठता. सोमवार को दिए एक इंटरव्यू के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ बातचीत की संभावना को खारिज कर करते हुए, अमेरिका के साथ हुए अपने पुराने अनुभव का भी जिक्र किया.
अमेरिका के साथ बातचीत का सवाल ही नहीं उठता- अब्बास अराघची
पीबीएस न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में अराघची से जब पूछा गया कि क्या ईरान के नए सर्वोच्च नेता, मोजतबा खामेनेई, फिर से बातचीत या युद्धविराम के लिए तैयार होंगे, तो उन्होंने कहा, "अभी उनके लिए कोई टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी." उन्होंने कहा, "लेकिन मुझे नहीं लगता कि अमेरिकियों के साथ बातचीत या फिर से वार्ता का सवाल उठेगा, क्योंकि जैसा कि आप जानते हैं, अमेरिकियों के साथ बातचीत का हमारा अनुभव बेहद कड़वा रहा है." इसके साथ ही अब्बास अराघची ने पिछले साल जून में हुए 12 दिनों के युद्ध का जिक्र किया, जब तेहरान और वाशिंगटन के बीच बातचीत के दौरान इजरायल और अमेरिकी सेनाओं ने ईरानी परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया था.
🚨 #BREAKING 🇮🇷🇺🇸
— Madhurendra kumar मधुरेन्द्र कुमार (@Madhurendra13) March 10, 2026
ईरान के विदेश मंत्री #AbbasAraghchi ने कहा कि फिलहाल अमेरिका के साथ बातचीत का सवाल ही नहीं उठता।
उन्होंने कहा कि ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत का “कड़वा अनुभव” रहा है
“पिछले साल जून में हम उनसे बातचीत कर रहे थे और उसी दौरान हम पर हमला हुआ।”
अराघची ने यह भी कहा… pic.twitter.com/spdoI7O4ES
फरवरी में हुई ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत
बता दें कि फरवरी के आखिर में जिनेवा में संपन्न हुए अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता का हवाला देते हुए, जहां दोनों पक्षों ने ओमान की मध्यस्थता में माहौल को गंभीर और रचनात्मक बताया था. अराघची ने कहा, "तीन दौर की बातचीत के बाद, और वार्ता में अमेरिकी टीम द्वारा खुद यह कहने के बावजूद कि हमने बड़ी प्रगति की है, फिर भी उन्होंने हम पर हमला करने का फैसला किया."
उन्होंने कहा, "इसलिए मुझे नहीं लगता कि अब अमेरिकियों से बातचीत करना हमारे एजेंडे में होगा." उन्होंने कहा कि नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के चयन से ईरान में “निरंतरता और स्थिरता” का संदेश है.
ईरान ने नहीं बंद किया होर्मुज जलडमरूमध्य
अराघची ने तर्क दिया कि "इजरायलियों और अमेरिकियों द्वारा हम पर किए गए हमलों और आक्रामकता के कारण" तेल उत्पादन और परिवहन धीमा हो गया है. उन्होंने यह भी जोर दिया कि इन हमलों ने "पूरे क्षेत्र को असुरक्षित बना दिया है." उन्होंने कहा, "इसीलिए टैंकर और जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने से डरते हैं." इसके साथ ही उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की कि ईरान ने जलडमरूमध्य को बंद नहीं किया है. अराघची ने "पूरे क्षेत्र को असुरक्षित और अस्थिर" बनाने के लिए इजरायलियों और अमेरिकियों को भी दोषी ठहराया. उन्होंने आगे कहा, "इसके परिणाम न केवल हमारे लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र और अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी बहुत गंभीर हैं."
जंग की आग में जल रहे मिडिल ईस्ट के देश
बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से 28 फरवरी को ईरान पर हमला कर दिया था. उसके बाद ईरान ने भी पलटवार करते हुए इजरायल समेत मध्य पूर्व के कई देशों को निशाना बनाया. जिसके चलते मिडिट ईस्ट के सभी देश अभी भी युद्ध की आग में जल रहे हैं. ईरान हर दिन खाड़ी के देशों पर हमला कर रहा है. जबकि अमेरिका और इजरायल ईरान में भारी तबाही मचा रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि युद्ध जल्द ही समाप्त हो जाएगा, लेकिन उन्होंने इसकी कोई तारीफ नहीं बताई.
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