मोदी-पुतिन सेल्फी पर अमेरिका में सियासी तूफान, संसद में उठा मुद्दा, ट्रंप की विदेश नीति पर तीखे सवाल

अमेरिकी कांग्रेस में मोदी-पुतिन सेल्फी को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है. डेमोक्रेट्स ने इसे ट्रंप की विफल विदेश नीति का नतीजा बताते हुए आरोप लगाया कि उनकी नीतियां भारत को रूस के और करीब धकेल रही हैं.

अमेरिकी कांग्रेस में मोदी-पुतिन सेल्फी को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है. डेमोक्रेट्स ने इसे ट्रंप की विफल विदेश नीति का नतीजा बताते हुए आरोप लगाया कि उनकी नीतियां भारत को रूस के और करीब धकेल रही हैं.

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Deepak Kumar
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अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की कार में ली गई सेल्फी का असर अब सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा. यह तस्वीर वहां की राजनीति के केंद्र अमेरिकी संसद (कांग्रेस) तक पहुंच गई है. कांग्रेस की विदेश नीति पर चल रही एक अहम सुनवाई के दौरान डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस सेल्फी को लेकर मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कटघरे में खड़ा कर दिया.

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सुनवाई के दौरान डेमोक्रेटिक सांसद सिडनी कमलागेर-डोव एक बड़ा पोस्टर लेकर आईं. इस पोस्टर पर मोदी और पुतिन की सेल्फी के साथ-साथ मोदी-पुतिन-जिनपिंग की एक और तस्वीर लगाई गई थी. पोस्टर पर लिखा था- “ट्रंप की विफल विदेश नीति.”

ट्रंप की नीतियां नाक कटाने जैसी: कमलागेर-डोव

कमलागेर-डोव ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की कठोर नीतियां ही भारत और रूस को और नजदीक ला रही हैं. उनका दावा था कि अमेरिकी नीतियां अपने ही साझेदार देशों को दूर धकेल रही हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर अमेरिका की स्थिति कमजोर हो रही है.

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उन्होंने भारत के प्रति ट्रंप सरकार के रवैये पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह नीतियां “नाक काटने जैसी” हैं- यानी अपने ही हितों को नुकसान पहुंचाने वाली. उन्होंने चेतावनी दी कि भारत पर लगातार दबाव डालने की नीति से दोनों देशों के बीच वर्षों से बना भरोसा गहराई से प्रभावित हो रहा है.

भारत से रिश्ते सुधारने के लिए उठाए कदम

सांसद ने पोस्टर की ओर इशारा करते हुए कहा, “यह तस्वीर बहुत कुछ कहती है. अगर हम अपने रणनीतिक साझेदारों को विरोधियों की तरफ धकेलते रहेंगे, तो कोई भी हमें शांति पुरस्कार देने वाला नहीं.”


उन्होंने आगे कहा कि यह समय बेहद संवेदनशील है और अमेरिका को तुरंत भारत के साथ रिश्तों को सुधारने के लिए कदम उठाने चाहिए. कमलागेर-डोव ने जोर देकर कहा कि पूरी अमेरिकी संसद को इस मुद्दे की गंभीरता समझनी चाहिए और इसे अत्यधिक प्राथमिकता के साथ संभालना चाहिए. इस तरह, एक साधारण सेल्फी ने अमेरिका की राजनीति में विदेश नीति पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है.

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