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पाकिस्तान न्यूज Photograph: (X/ani)
अमेरिका और भारत के बीच 2 फरवरी को घोषित व्यापार समझौते के बाद पाकिस्तान की राजनीतिक नेतृत्व और सैन्य प्रतिष्ठान पर देश के भीतर तीखी आलोचना शुरू हो गई है. इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया, जबकि पाकिस्तान को 19 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ा. यह अंतर भले ही मात्र एक प्रतिशत का हो, लेकिन पाकिस्तान में इसे कूटनीतिक विफलता और राष्ट्रीय अपमान के रूप में देखा जा रहा है.
आलोचकों का कहना है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनिर द्वारा वाशिंगटन में की गई व्यापक लॉबिंग के बावजूद पाकिस्तान बेहतर शर्तें हासिल नहीं कर सका. इसके विपरीत, भारत ने सीमित संवाद के बावजूद अधिक अनुकूल समझौता कर लिया.
हार्ड बार्गेन बनाम कूटनीतिक याचना
विपक्षी दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेताओं ने भारत और पाकिस्तान के दृष्टिकोण की तुलना करते हुए कहा कि भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता के साथ बातचीत की, जबकि पाकिस्तान ने व्यक्तिगत संबंधों के सहारे रियायतें पाने की कोशिश की. सोशल मीडिया पर इस्लामाबाद और वाशिंगटन के बीच लगातार यात्राओं का मजाक उड़ाया गया और इन्हें राष्ट्रीय हित के बजाय राजनीतिक अस्तित्व से जोड़ा गया.
पत्रकारों और विश्लेषकों की प्रतिक्रिया
वरिष्ठ पत्रकार असद तूर ने कहा कि पाकिस्तान की गिरती अर्थव्यवस्था के संदर्भ में यह टैरिफ परिणाम और भी नुकसानदेह है. उनके अनुसार निर्यात में गिरावट, विदेशी निवेश का लगभग समाप्त होना और कमजोर सौदेबाजी शक्ति इस नतीजे में साफ झलकती है.
रणनीतिक विश्लेषक मोईद पीरज़ादा ने भी तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह धारणा गलत साबित हुई कि व्यक्तिगत संबंधों के जरिए अमेरिका से रियायतें मिल सकती हैं. उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को, रूस नीति पर असहमति के बावजूद, फोन कॉल के जरिए 18 प्रतिशत टैरिफ दे दिया, जबकि पाकिस्तान को पूर्ण सहयोग के बाद भी 19 प्रतिशत मिला. पत्रकार इमरान रियाज़ ख़ान ने सरकार की रणनीति को विश्वसनीयता की विफलता बताया और कहा कि केवल संसाधनों की पेशकश से अंतरराष्ट्रीय सम्मान नहीं खरीदा जा सकता.
नैरेटिव मैनेजमेंट के आरोप
इमरान रियाज़ ख़ान ने यह भी दावा किया कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है. उनके अनुसार, इसके तहत भारत ने मई 2025 की भारत-पाकिस्तान हवाई झड़पों पर अमेरिकी बयानबाज़ी को रोकने में सफलता पाई. इससे पहले ट्रंप ने भारतीय विमानों के गिराए जाने का दावा किया था.
भारत से बढ़ती तुलना
आलोचकों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देते हुए अमेरिका से बातचीत की, जबकि पाकिस्तान घरेलू राजनीतिक दबावों में उलझा रहा. डिजिटल क्रिएटर वजाहत ख़ान ने लिखा कि अमेरिका ने भारत को साझेदार और पाकिस्तान को एक कमजोर सौदेबाज के रूप में देखा. सोशल मीडिया पर शहबाज़–मुनिर नेतृत्व के खिलाफ ट्रेंड्स देखने को मिले, जहां यूज़र्स ने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग देश की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति के बजाय अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं.
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