News Nation Logo

अब अमेरिका ने एंटी-रोहिंग्या हिंसा को लेकर फेसबुक पर नजरें करी टेढ़ी : जाने क्या है वजह

अब अमेरिका ने भी फेसबुक पर नजरें टेढ़ी कर ली है. वहां के एक जज ने फेसबुक को चेतावनी देते हुए कहा है कि फेसबुक एंटी-रोहिंग्या हिंसा से जुड़े सक्रिय अकाउंट की जानकारी साझा करे. वॉशिंगटन डी सी के जज ने कहा की फेसबुक उन्हे उन लोगो की जानकारी नहीं दे रहा

News Nation Bureau | Edited By : Nandini Shukla | Updated on: 23 Sep 2021, 03:34:11 PM
myanmar

अब अमेरिका ने एंटी-रोहिंग्या हिंसा को लेकर फेसबुक पर नजरें करी टेढ़ (Photo Credit: fille photo)

New Delhi :

अब अमेरिका ने भी फेसबुक पर नजरें टेढ़ी कर ली है. वहां के एक जज ने फेसबुक को चेतावनी देते हुए कहा है कि फेसबुक एंटी-रोहिंग्या हिंसा से जुड़े सक्रिय अकाउंट की जानकारी साझा करे. वॉशिंगटन डी सी के जज ने कहा की  फेसबुक उन्हे उन लोगो की जानकारी नहीं दे रहा है जो लोग मुस्लिम अल्पसंख्यक रोहिंग्या के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिए देश पर मुकदमे का सामना करने के लिए उपयुक्त है. हालांकि फेसबुक ने कानून का हवाला देते हुए यह जानकारी देने से मना कर दिया है. गौरतलब है कि  गाम्बिया अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में म्यांमार के खिलाफ रोहिंग्या के प्रति हिंसा को लेकर रिकॉर्ड की मांग कर रहा है. इसमें  म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों को खत्म करने के आरोप में 1948 के संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है.  

यह भी पढे़ - सीबीआई ने श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर बैंक के कॉरपोरेट मुख्यालय पर छापा मारा

म्यांमार के अधिकारियों का कहना है कि वे सशस्त्र विद्रोह से जूझ रहे थे और  व्यवस्थित अत्याचार करने से इनकार करते हैं. वही म्यांमार के अधिकारियों का कहना है कि वे सशस्त्र विद्रोह से जूझ रहे थे और अत्याचार करने से इनकार करते हैं. अगस्त 2017 में 730, 000 से अधिक मुस्लिम रोहिंग्या म्यांमार के पश्चिमी  राज्य से भाग गए थे, जिसमें एक सैन्य कार्रवाई के बाद शरणार्थियों ने कहा कि इसमें सामूहिक हत्याएं और बलात्कार शामिल हैं. वही अधिकार समूहों ने नागरिकों की हत्याओं और गांवों को जलाने का इल्ज़ाम भी लगाया. ट्विटर पर मानवाधिकार वकील शैनन राज सिंह ने इस फैसले को महत्वपूर्ण बताया . पिछले 10 वर्षों में म्यांमार में फेसबुक आग की चपेट में आ गया था - जिसके दौरान रोहिंग्या हिंसा की लगातार लहरों का शिकार हुए थे,  समुदाय के खिलाफ निर्देशित अभद्र भाषा की मात्रा के लिए. संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं का कहना है कि मंच ने अभद्र भाषा फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसने 2017 में कार्रवाई को बढ़ावा दिया गया.  जब म्यांमार की सेना ने रोहिंग्या के खिलाफ हिंसा का अभियान शुरू किया था, जिसमें ज्यादातर मुस्लिम अल्पसंख्यक थे.  एक "निकासी अभियान" के बैनर तले रोहिंग्या समुदायों पर हमला किया गया, रोहिंग्या महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और बलात्कार किया गया, और पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को बेरहमी से मार डाला गया. रोहिंग्या के खिलाफ क्रूर सैन्य अभियान शुरू होने के तुरंत बाद, ह्यूमन राइट्स वॉच ने बताया कि सेना द्वारा कम से कम 200 रोहिंग्या गांवों को नष्ट कर दिया गया और जला दिया गया, और अनुमानित 13,000 रोहिंग्या मारे गए.  वही 
बांग्लादेश में रोहिंग्या के लोगो को बहुत सारी मुसीबतों को सामना करना पड़ा .

यह भी पढे़- राजस्थान भाजपा के चिंतन शिविर में दिग्गजों की कमी से कई सवाल हुए खड़े

एक हफ्ते की भारी बारिश ने बांग्लादेश में 21,000 से अधिक रोहिंग्या शरणार्थियों को विस्थापित कर दिया.  परिणामस्वरूप बाढ़ और भूस्खलन ने लगभग 6,418 आश्रयों को नष्ट कर दिया .मानसून के महीनों के अभी भी आगे के साथ, शरणार्थियों को जोखिम का सामना करना पड़ता है क्योंकि उन्हें ऐसे उपाय करने से रोका जा रहा था जो बाढ़ से होने वाली तबाही को कम कर सकते हैं.  कॉक्स बाजार में शरणार्थी शिविरों में, जहां लगभग दस लाख रोहिंग्या शरणार्थी, जो म्यांमार की सेना के अत्याचारों से भागे थे, रहते हैं, बांग्लादेश के अधिकारियों ने न केवल वार्षिक मानसून, बल्कि लगातार शुष्क मौसम की आग का सामना करने में सक्षम मजबूत आश्रयों के निर्माण पर रोक लगा दी थी.  यह प्रतिबंध दुनिया के सबसे बड़े शरणार्थी शिविर में रह रहे रोहिंग्याओं को लगातार याद दिलाता है कि उनका बांग्लादेश में रहना अस्थायी है. 

HIGHLIGHTS 

  • अमेरिका ने भी फेसबुक पर नजरें टेढ़ी कर ली
  • एंटी-रोहिंग्या हिंसा से जुड़े सक्रिय अकाउंट की जानकारी साझा करे
  • संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप

First Published : 23 Sep 2021, 03:34:11 PM

For all the Latest World News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.