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वैज्ञानिकों ने किया भगवान के चेहरे का खुलासा, जानें असल में कैसा दिखता है ईश्वर

वैज्ञानिकों ने अमरीकी ईसाईयों की मदद से च​यनित किए गए चेहरों से एक समग्र 'ईश्वर का चेहरा' का रूप दिया है. जिससे पता चलता है कि प्रत्येक व्यक्ति ने ईश्वर को कैसे प्रकट किया. वैज्ञानिकों के इस शोध के परिणाम में चौंकाने वाले थे. वैज्ञा​निकों ने पाया गया

News Nation Bureau | Edited By : Mohit Sharma | Updated on: 09 Nov 2021, 07:04:10 PM
God

God (Photo Credit: News Nation)

नई दिल्ली:  

विज्ञान आज भले ही कितना भी आगे चला गया हो, लेकिन एक रहस्य ऐसा है जिसको वैज्ञानिक भी नहीं जान पाए हैं. वो है ईश्वर का रहस्य. आज भी अधिकांश लोगों के जेहन में एक सवाल रह-रह कर उठता है. कि क्या ईश्वर है? अगर है तो फिर वो कैसा दिखता है...क्या बिल्कुल वैसा जैसा कि हमने उसे मंदिरों, गिरजाघरों और मूर्तियों में देखा है या फिर कुछ ओर...लेकिन  अमेरिका के वैज्ञानिकों ने लोगों के इस सवाल का भी जवाब तलाश लिया है. दरअसल, एक ऐसा ही शोध में वैज्ञानिकों और मनोवैज्ञानिकों ने भगवान का चित्र बनाया है, जिसको 'ईश्वर का चेहरा'  कहा गया है. इस काम में वैज्ञानिकों ने 511 अमरीकी ईसाईयों की मदद ली है और यूनिवर्सिटी ऑफ नार्थ कैलिफोर्निया के चेपल हिल पर ये चित्र बनाया. 

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दरअसल, वैज्ञानिकों ने अमरीकी ईसाईयों की मदद से च​यनित किए गए चेहरों से एक समग्र 'ईश्वर का चेहरा' का रूप दिया है. जिससे पता चलता है कि प्रत्येक व्यक्ति ने ईश्वर को कैसे प्रकट किया. वैज्ञानिकों के इस शोध के परिणाम में चौंकाने वाले थे. वैज्ञा​निकों ने पाया गया कि कई लोगों ने ईश्वर को छोटी, अधिक स्त्री और कम कोकेशियान के तौर पर देखा है. आपको बता दें कि वैज्ञानिकों ने जिल ईसाईयों को इस शोध में शामिल किया उन्होंने आंशिक रूप से अपने राजनीतिक विचारधारा पर अधिक विश्वास किया. जो लिबरल थे उन्होंने भगवान को अधिक स्त्री, छोटे और अधिक प्यार भरे चित्र में देखा. 

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जबकि जो लोग कंज़रवेटिव थे उन्होंने ईश्वर को कोकेशियान और उदारवादियों से ज्यादा पॉवरफुल दिखाया. यहां एक बात गौर करने वाली है कि लोगों की सोच और धारणाएं भी अपनी जनसांख्यिकीय विशेषताओं से ही जुड़ी हैं. जैसे कि छोटे कद काठी वाले लोग अपने ही जैसे कम लंबाई वाले ईश्वर पर भरोसा करते हैं. वहीं, जो लोग लंबे और बल्ष्ठि थे वो आकर्षक दिखने वाले भगवान में विश्वास रखते थे. ये पूरी रिसर्च पत्रिका PLOS वन में प्रकाशित कि गई.

First Published : 09 Nov 2021, 07:04:10 PM

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