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इजरायल में बेंजामिन नेतन्याहू भी फिर पीएम बनने के लिए 'राम' भरोसे

इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं. ऐसे में बहुमत के लिए बेंजामिन नेतन्याहू को कम के कम 61 सीटों की व्यवस्था हर हाल में करनी ही होगी.

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 25 Mar 2021, 09:09:27 AM
Benjamin Netanyahu

हालिया चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी को बहुमत मिलता नहीं दिख रहा. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के लिए नेतन्याहू की राह में अड़चन
  • बहुमत के लिए कम के कम 61 सीटों की जरूरत है बेंजामिन को
  • ऐसे में कट्टरपंथी राम पार्टी का सहयोग चाहिए होगा नेतन्याहू को

तेल अवीव:

इजरायल (Israel) में संपन्न चुनाव में 'राम' (Raam) नाम की एक कट्टर अरब इस्लामी पार्टी किंगमेकर बतौर उभरी है. गुरुवार सुबह तक 90 फीसदी वोटों की गिनती होने के बाद भी घोर दक्षिणपंथी माने जाने वाली बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) की पार्टी लिकुड और उसके सहयोगी दलों को 59 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं. इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं. ऐसे में बहुमत के लिए बेंजामिन नेतन्याहू को कम के कम 61 सीटों की व्यवस्था हर हाल में करनी ही होगी. बेंजामिन नेतन्याहू कट्टर राष्ट्रवादी (Nationalist) विचारधारा के प्रतीक माने जाते हैं. वे फिलिस्तीनियों को अधिक छूट दिए जाने या फिर गाजा पट्टी में इजरायली कॉलोनियों के विस्तार को रोकने के खिलाफ रहे हैं, जबकि राम पार्टी की विचारधारा ठीक इसके विपरीत है. ऐसे में यह देखना जरूरी होगा कि क्या राम अपने अप्राकृतिक सहयोगी कहे जाने वाले कट्टर राष्ट्रवादी लिकुड पार्टी को समर्थन देता है कि नहीं.

अंतर बहुत कम
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन और उनके विरोधी दलों के गठबंधन के बीच अंतर बहुत कम है. नेतन्याहू के विरोधी दलों के गठबंधन को 56 सीटें मिलने का अनुमान है. ऐसे में राम पार्टी की सरकार बनाने में बड़ी भूमिका देखी जा रही है. इस चुनाव में राम पार्टी को कम से कम 5 सीटें मिलने का अनुमान है. अगर वह लिकुड पार्टी के गठबंधन को समर्थन दे देती है तो नेतन्याहू के फिर से प्रधानमंत्री बनने का सपना पूरा हो जाएगा.

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अभी तक नहीं किया समर्थन का ऐलान
इस पार्टी ने फिलहाल किसी को समर्थन देने की घोषणा नहीं की है लेकिन हालात को देखते हुए इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि यूनाइटेड अरब लिस्ट, जिसे हिब्रू में राम कहा जाता है, इस बारे में फैसला कर सकती है कि इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे नेतन्याहू सत्ता में रहेंगे या नहीं. विपक्षी दल के नेता याईर लपिड ने रक्षा मंत्री बेनी गांट्ज के सहयोग से पिछले साल चुनाव लड़ा था लेकिन नेतन्याहू और गांट्ज के बीच सत्ता की साझेदारी को लेकर हुए समझौते के बाद वह पीछे हट गए थे. इस बार उन्होंने नेतन्याहू को हराने का दावा करते हुए प्रचार किया है.

राम पार्टी को जानिए
राम पार्टी इजरायल में अरब मूल के निवासियों का नेतृत्व करने का दावा करती है. यहूदी बहुल इस देश में अरब मुस्लिमों की तादाद बहुत ज्यादा नहीं है. उनमें से भी बहुत से मुस्लिम मतदाता अलग-अलग पार्टियों के समर्थक हैं. ऐसा पहली बार देखा गया है कि इजरायल के चुनाव में फिलिस्तीन और अरब देशों के साथ अच्छे रिश्ते रखने के समर्थक राम पार्टी को पांच सीटों के मिलने के बराबर वोट मिला है. इजरायल की संसद नेसेट का चुनाव अनुपातिक मतदान प्रणाली के आधार पर होता है, जिसमें मतदाता को बैलेट पेपर पर प्रत्याशियों की जगह पार्टी को मतदान करना होता है, पार्टियों को मिले मत प्रतिशत के अनुपात में उन्हें संसद की सीटें आवंटित कर दी जाती हैं, यह प्रक्रिया 28 दिनों के अंदर पूरी कर ली जाती है, अगर किसी पार्टी को 10 फीसदी वोट मिलता है तो उसे संसद की कुल 120 सीटों का 10 फीसदी यानी 12 सीटें दी जाती हैं.

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न्यूनतम 3.5 फीसदी वोट पाना जरूरी
किसी भी पार्टी को नेसेट (संसद) में पहुंचने के लिए कुल मतदान में से न्यूनतम 3.25 फीसदी वोट पाना जरूरी है. यदि किसी पार्टी का वोट प्रतिशत 3.25 से कम होता है तो उसे संसद में सीट नहीं दी जाती है. चुनाव से पहले इजरायल की हर पार्टी अपने उम्मीदवारों के प्रिफरेंस के आधार पर एक सूची जारी करती है. इसी के आधार पर चुनाव में जीत के बाद सांसद को चुना जाता है. अगर किसी सांसद की कार्यकाल के दौरान मौत हो जाती है तो इस सूची में शामिल बाद के नेताओं को मौका दिया जाता है. इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है, जो प्राचीन हिब्रू शब्द है. यहूदी परंपरा के अनुसार 120 ऋषियों और पैगंबरों की एक विधानसभा थी. नेसेट के सदस्य का कार्यकाल चार साल का होता है. इसके जरिए इजरायल के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का चुनाव होता है. नेसेट में ही इजरायल का कानून बनता है.

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First Published : 25 Mar 2021, 09:03:52 AM

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