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इजरायल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. दोनों देशों ने दावा किया है कि यह हमला ईरान की ओर से उत्पन्न 'आसन्न और गंभीर खतरे' को निष्प्रभावी करने के उद्देश्य से किया गया है.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेत्यनाहू ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह कदम देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया एक रणनीतिक निर्णय है. उन्होंने कहा कि इजरायल और अमेरिका ने मिलकर एक ऐसा अभियान शुरू किया है जिसका मकसद ईरानी शासन से पैदा हो रहे खतरे को समाप्त करना है.
नेतन्याहू का संदेश और ईरानी जनता से अपील
नेतन्याहू ने अपने संबोधन में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आभार जताते हुए उनकी नेतृत्व क्षमता को 'ऐतिहासिक' बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान का मौजूदा शासन लंबे समय से इजरायल और अमेरिका के खिलाफ आक्रामक नीतियां अपनाता रहा है और उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जाना जरूरी है.
🚨 Sirens sounding across Israel pic.twitter.com/qX6OBgNs2k
— Israel Defense Forces (@IDF) February 28, 2026
प्रधानमंत्री ने ईरान के नागरिकों से भी अपील की कि वे 'अत्याचार की जंजीरों' से मुक्त होकर अपने भविष्य का फैसला खुद करें. उन्होंने फारसी, कुर्द, अजरबैजानी, बलोच और अहवाज़ी समुदायों का जिक्र करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि वे एक स्वतंत्र और शांतिपूर्ण ईरान की दिशा में कदम बढ़ाएं.
सैन्य अभियान की रूपरेखा
इजरायली सेना ने इस कार्रवाई को 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' नाम दिया है. सेना के अनुसार, यह ऑपरेशन ईरान के परमाणु और सैन्य ढांचे को कमजोर करने के लिए शुरू किया गया है. इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने बयान जारी कर कहा कि संयुक्त अभियान का उद्देश्य दीर्घकालिक खतरे को खत्म करना और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना है.
रिपोर्टों के मुताबिक, हमले के बाद इजरायल ने अपने हवाई क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी है. संभावित जवाबी कार्रवाई की आशंका को देखते हुए नागरिक सुरक्षा प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए गए हैं.
🇮🇱 🤝 🇺🇸 OPERATION ROARING LION: The IDF and the U.S Armed Forces have launched a broad & joint operation to thoroughly degrade the Iranian terrorist regime and to remove existential threats to Israel over time.
— Israel Defense Forces (@IDF) February 28, 2026
The Iranian regime has not abandoned its plan to destroy Israel.…
ट्रंप की सख्त चेतावनी
हमले से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी सशस्त्र बलों को खुली चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि यदि ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड हथियार डाल देते हैं तो उन्हें 'पूर्ण छूट' दी जाएगी, अन्यथा उन्हें 'निश्चित परिणाम' भुगतने होंगे. ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन का लक्ष्य ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकाने हैं, न कि आम नागरिक.
क्षेत्रीय और वैश्विक असर
इस संयुक्त कार्रवाई ने मध्य पूर्व में व्यापक अस्थिरता की आशंका को जन्म दिया है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब ईरान की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास तेज नहीं किए गए, तो यह टकराव बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है.
फिलहाल, वैश्विक शक्तियां संयम बरतने और वार्ता की राह तलाशने की अपील कर रही हैं, जबकि जमीन पर हालात तेजी से बदल रहे हैं.
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