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mea Photograph: (social media)
भारत पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने के अमेरिकी कांग्रेस के प्रस्ताव पर विदेश मंत्रालय का बयान सामने आया है. विदेश मंत्रालय का कहना है कि हम इसपर नजर बनाए हुए हैं, मगर भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के हिसाब से बाजार में उपलब्ध विकल्प के आधार पर तेल खरीदने का फैसला लेता रहेगा. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "कई मौकों पर हम समझौते के काफी करीब थे. इन चर्चाओं का जो विवरण दिया गया है और जो बयान सामने आए हैं, वे सटीक नहीं हैं.
जायसवाल के अनुसार, पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते एक साल में कई बार फोन पर बात की है. इसमें भारत और अमेरिका के बीच व्यापक साझेदारी के खास पहलुओं चर्चा हुई.
रक्षा को लेकर ईंधन के स्रोत तलाशते रहेंगे
जायसवाल ने कहा कि हम अपनी 140 करोड़ जनता के हितो की रक्षा को लेकर ईंधन के स्रोत तलाशते रहेंगे. इसके साथ ही भारत ने बांग्लादेश में जारी सांप्रदायिक हिंसा पर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों पर लगातार अत्याचार जारी है. घरों पर बार-बार हमले हो रहे हैं. भारत ने इसे एक खतरनाक पैटर्न बताया है. दोषियों को सजा देने के बजाए उन्हें बचाया जाना ठीक नहीं है. भारत अपनी सुरक्षा को लेकर जरूरी कदम उठाएगा.
हम किसी भी देश में तेल खरीद को लेकर स्वतंत्र: MEA
MEA के अनुसार, भारत सरकार अमेरिका के ‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025’ पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं. रणधीर जायसवाल के अनुसार, हमारी ऊर्जा खरीद की नीति पूरी तरह से स्पष्ट है. हम ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव और अपनी जरूरतों के तहत फैसले लेते हैं. भारत किसी भी देश से तेल खरीदने को लेकर पूरी तरह से स्वतंत्र है. हमारी प्राथमिकता सस्ती ऊर्जा के माध्यम से देश की सुरक्षा को तय करना है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर दुनिया के हर बाजार को देख रहे हैं. हम 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे.
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