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ईरान की तबाही की रिपोर्ट Photograph: (X/@IDF)
इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग को आज सात दिन पूरे हो गए हैं, लेकिन दोनों ही देश पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. पिछले 100 घंटों से आसमान से सिर्फ मौत बरस रही है. इजराइल की सेना (IDF) लगातार ईरान के अलग-अलग हिस्सों में मिसाइलों और घातक ड्रोनों से हमले कर रही है. इन हमलों ने ईरान की कमर तोड़ दी है, लेकिन जवाबी कार्रवाई में ईरान भी इजराइल के कई शहरों पर ड्रोन बरसा रहा है. यह जंग अब सिर्फ दो देशों के बीच नहीं रही, बल्कि इसमें अमेरिका के शामिल होने से इसने पूरे विश्व के लिए खतरा पैदा कर दिया है.
100 घंटों का खतरनाक रिपोर्ट कार्ड
इजराइल ने इस युद्ध के 100 घंटे पूरे होने पर रिपोर्ट जारी की है, जिसे उन्होंने 'ऑपरेशन रोअरिंग' (Operation Roaring) का नाम दिया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल ने अपने सबसे बड़े दुश्मन और ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई को मार गिराया है. यह इस सदी का सबसे बड़ा सैन्य उलटफेर माना जा रहा है. इजराइल का दावा है कि उन्होंने न केवल खामेनेई, बल्कि ईरान की सेना के 40 से ज्यादा बड़े अधिकारियों को भी मौत के घाट उतार दिया है. इन अधिकारियों की मौत से ईरान की सैन्य रणनीति पूरी तरह चरमरा गई है।
सैन्य ठिकानों और मिसाइल लॉन्चरों का खात्मा
इस जंग में इजराइल का निशाना सिर्फ बड़े नेता ही नहीं, बल्कि ईरान की सैन्य ताकत भी है. इजराइली सेना ने बताया है कि उन्होंने अब तक ईरान के 600 से ज्यादा सैन्य ठिकानों और सरकारी इमारतों को खंडहर में तब्दील कर दिया है. इसके साथ ही, ईरान के पास जो सबसे बड़ा खतरा 'मिसाइल लॉन्चर' का था, इजराइल ने उनमें से 300 से ज्यादा लॉन्चरों को हवा में ही उड़ा दिया है. इस कार्रवाई का मकसद ईरान की हमला करने की क्षमता को पूरी तरह खत्म करना है, ताकि वह दोबारा इजराइल की ओर आंख उठाकर न देख सके.
जब मारा गया सुप्रीम लीडर
इस महायुद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब इजराइल और अमेरिका ने मिलकर एक साझा ऑपरेशन चलाया. इस हमले का मुख्य लक्ष्य ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई थे. खुफिया जानकारी के आधार पर किए गए इस सटीक हमले में खामेनेई की जान चली गई. खामेनेई की मौत की खबर फैलते ही पूरे मिडिल ईस्ट में आग लग गई. ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर सबसे बड़ा हमला माना और तुरंत बदला लेने की घोषणा कर दी. इसी के बाद से यह जंग एक ऐसे मोड़ पर आ गई है जहां से वापसी का कोई रास्ता नजर नहीं आता.
अमेरिकी बेस और पड़ोसी देशों पर हमला
अपने नेता की मौत से बौखलाए ईरान ने सबसे पहले उन इलाकों को निशाना बनाया जहां अमेरिका का सैन्य अड्डा था. मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेसों पर ईरान ने ताबड़तोड़ मिसाइलें दागीं. इसके बाद ईरान ने इजराइल के रिहायशी इलाकों पर ड्रोन हमले शुरू किए. चौंकाने वाली बात यह है कि ईरान ने केवल इजराइल को ही नहीं, बल्कि सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और ओमान के रिहायशी इलाकों को भी निशाना बनाया है. ईरान का मानना है कि इन देशों ने भी किसी न किसी रूप में इस हमले में साथ दिया है, जिसके चलते उसने पूरे क्षेत्र में तबाही मचा दी है.
In just 100 hours, this is what the IDF achieved: pic.twitter.com/vPUFgFft4D
— Israel Defense Forces (@IDF) March 5, 2026
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर कब्जा
युद्ध के बीच ईरान ने दुनिया की दुखती रग पर हाथ रख दिया है. ईरान ने समुद्र के उस रास्ते यानी 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' पर अपनी कड़ी नजर बना ली है, जहां से पूरी दुनिया का तेल सप्लाई होता है. ईरान अब तेल ले जाने वाले बड़े जहाजों (Oil Tankers) को निशाना बना रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने ये रास्त चीन के लिए सिर्फ खुला रखा है, और ईरान ने कहा कि चीन फ्लैग वाली ही जहाज को क्रॉस करने देंगे.
युद्ध के मैदान से नुकसान का आंकड़ा
ईरान में अब तक इस 7 दिन के जंग में 1200 से अधिक लोगों की मौत हो गई है. वहीं, 40+ टॉप जनरल और अधिकारी मारे गए. साथ ही 600+ इमारतें और ठिकाने तबाह कर दिए गए हैं. इसके अलावा 300 से अधिक मिसाइल लॉन्चर को खत्म कर दिया गया है.
लाशों के ढेर में तब्दील होते शहर
हथियारों की इस लड़ाई में सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता का हो रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में अब तक 1200 से ज्यादा लोगों की जान जा गई है. इजराइल के शहरों में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है, वहां भी लोग मिसाइल हमलों का शिकार हो रहे हैं. अस्पतालों में घायलों की इतनी भीड़ है कि वहां पैर रखने की जगह नहीं बची है. दवाइयों और इलाज के सामान की कमी होने लगी है। यह युद्ध अब सैनिकों की लड़ाई से आगे बढ़कर आम मासूमों की जान का दुश्मन बन गया है.
इजराइल में कुछ ऐसा ही मंजर
इस जंग ने मिडिल ईस्ट के बड़े शहरों की रौनक छीन ली है. तेल अवीव से लेकर तेहरान तक, हर जगह सन्नाटा पसरा है. सभी स्कूल, कॉलेज और दफ्तरों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है. बाजार पूरी तरह ठप हैं और दुकानों पर ताले लटके हैं. लोगों के मन में इतना डर है कि वे अपने घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं.
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