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बेरूत में इज़राइल की बड़ी कार्रवाई Photograph: (NN)
इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का आज चौथा दिन है और हालात काफी गंभीर हो गए हैं. इजराइल ने ईरान पर लगातार अटैक तो कर रही रहा है. वहीं, इसी बीच इजराइल ने एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए लेबनान की राजधानी बेरूत पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं. ये हमला सीधे हिजबुल्लाह के ठिकानों पर किया है. इजराइल का ये हमला इतना खतरनाक था कि बेरूत में तबाही मचा दिया है.
बेरुत में इजराइल की बड़ी कार्रवाई
जंग के चौथे दिन इजराइली वायु सेना ने ईरान के साथ-साथ बेरूत में हिजबुल्लाह के कई ठिकानों को अपना निशाना बनाया. इज़राइल का कहना है कि उन्होंने हिजबुल्लाह के जासूसी मुख्यालय (Intelligence HQ), हथियारों के गोदामों और उनके सैटेलाइट बातचीत करने वाले सेंटरों पर एक के बाद एक कई हमले किए हैं. इजराइल ने साफ कर दिया है कि वह हिजबुल्लाहकी कमर तोड़ने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगा.
आम लोगों के बीच छिपा था नेटवर्क
इजराइली सेना (IDF) ने इन हमलों का एक वीडियो भी जारी किया है. सेना का दावा है कि हिजबुल्लाहअपने जासूसी काम, प्रोपोगेंडा फैलाने और आतंकी गतिविधियों के लिए जिन जगहों का इस्तेमाल कर रहा था, उन्हें जानबूझकर आम लोगों के घरों और इमारतों के बीच बनाया गया था. इज़राइल का कहना है कि हिजबुल्लाहनागरिकों को एक ढाल की तरह इस्तेमाल करता है, ताकि उन पर हमला करना मुश्किल हो जाए.
आखिर कौन है हिजबुल्लाह?
अब सवाल आता है कि ये हिजबुल्लाह असल में है कौन? हिजबुल्लाहलेबनान का एक बहुत शक्तिशाली राजनीतिक और उग्रवादी सैन्य संगठन है. इसकी शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी. यह एक शिया मुस्लिम ग्रुप है जिसे ईरान का पूरा समर्थन हासिल है. लेबनान की सरकार में भी इनका काफी दखल है और इनके पास अपनी एक बहुत बड़ी और आधुनिक फौज है, जो कई देशों की सरकारी सेनाओं से भी ज्यादा ताकतवर मानी जाती है.
इजराइल के लिए क्यों है बड़ा खतरा?
इजराइल हिजबुल्लाह को अपने लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है. इसके पीछे कई कारण हैं. पहला यह कि हिजबुल्लाहके पास हजारों की तादाद में रॉकेट और मिसाइलें हैं जो इजराइल के किसी भी शहर को निशाना बना सकती हैं. दूसरा, हिजबुल्लाहइजराइल की उत्तरी सीमा के बिल्कुल पास मौजूद है, जिससे घुसपैठ का डर हमेशा बना रहता है. इजराइल इसे ईरान का एक मोहरा मानता है जो उसके घर के ठीक बाहर बैठा है. बता दें कि साल 2006 में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच 34 दिन तक युद्ध चली, जिसमें लेबनान लगभग तबाह हो गया था, और वहीं, इस युद्ध से इजराइल को भी काफी क्षति हुई थी.
🚨 #BREAKING 🇮🇱🇱🇧#Israel की वायुसेना ने बेरूत क्षेत्र में हिज़्बुल्लाह के इंटेलिजेंस मुख्यालय, हथियार भंडार और सैटेलाइट संचार अवसंरचना पर हमलों की एक श्रृंखला पूरी की।
— Madhurendra kumar मधुरेन्द्र कुमार (@Madhurendra13) March 3, 2026
📌 सेना के अनुसार, निशाना बनाए गए संचार स्थलों का उपयोग #Hezbollah द्वारा आतंक गतिविधियों, खुफिया संग्रह और… pic.twitter.com/i5N3e3Pc6c
ईरान और अमेरिका की भूमिका
इस पूरी जंग में सिर्फ इजराइल और हिजबुल्लाह ही शामिल नहीं हैं. इसके पीछे ईरान और अमेरिका की बड़ी भूमिका है. ईरान हिजबुल्लाह को पैसे, हथियार और ट्रेनिंग देता है, जबकि अमेरिका इजराइल का सबसे पुराना और भरोसेमंद दोस्त है. ऐसे में अमेरिका बिना शर्त इजराइल को सपोर्ट करता है, जैसे वर्तमान में ईरान के खिलाफ इजराइल का साथ दे रहा है.
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