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पीएम बेंजामिन नेतन्याहू Photograph: (NN)
गाजा में जारी युद्ध सिर्फ हमास के खिलाफ संघर्ष नहीं है, बल्कि इसे इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक लड़ाई के तौर पर भी देखा जा रहा है. यह युद्ध नेतन्याहू की सत्ता बचाने की रणनीति से गहराई से जुड़ा है.
द गार्जियन के मुताबिक, 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद जब सरकार की सुरक्षा विफलताओं पर सवाल उठे, तो नेतन्याहू ने सारा दोष सेना पर डाल दिया. इसके बाद सेना और खुफिया एजेंसियों से उनके रिश्ते लगातार बिगड़ते गए.
उन्होंने धीरे-धीरे सीनियर सैन्य अधिकारियों को हटाकर अपनी वफादार टीम को बैठाना शुरू किया. इन बदलावों से उन्होंने युद्ध की कहानी अपने मुताबिक गढ़ने की कोशिश की. चाहे वह हिज़्बुल्लाह और ईरान पर कठोर कदम हों या सीरिया में असद शासन को कमजोर करने के दावे.
अपनी करीबी को बनाया चीफ ऑफ स्टाफ
मार्च 2024 में नेतन्याहू ने किर्या तेल अवीव स्थित सैन्य मुख्यालय पर अपनी पकड़ और मज़बूत करने की कोशिश की. उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़मीर को नया चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया, जो पहले उनके करीबी सहयोगी रह चुके थे. शुरुआत में ज़मीर ने प्रधानमंत्री की लाइन पर चलते हुए गाज़ा पर हमले तेज़ किए. लेकिन समय बीतने के साथ दोनों के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे.
इस्तीफ तक बात पहुंच गई
ज़मीर का कहना था कि बंधकों की सुरक्षा और सेना की जिम्मेदारी सर्वोपरि है, जबकि नेतन्याहू का ध्यान अपनी सत्ता बचाने और फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर लंबे समय तक कब्जा बनाए रखने पर था. यह टकराव अगस्त तक इतना बढ़ गया कि ज़मीर ने इस्तीफे की धमकी दे डाली. उन्होंने साफ संकेत दिया कि अगर सेना को राजनीतिक हितों के लिए कब्जे में झोंका गया, तो वे पद छोड़ देंगे.
पीएम के बेटे ने लगाए गंभीर आरोप
हालात तब और तनावपूर्ण हो गए जब नेतन्याहू के बेटे याइर ने सेना प्रमुख पर तख़्तापलट की साजिश का आरोप जड़ दिया. इस विवाद को शांत करने के लिए आखिर में समझौता निकाला गया. गाजा सिटी पर कब्जे तक ही सीमित रहा जाएगा और आगे की योजनाओं को रोक दिया जाएगा.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि नेतन्याहू युद्ध को अपनी राजनीतिक ढाल बना रहे हैं. लंबे युद्ध से जहां उनका सत्ता पर नियंत्रण मजबूत होता है, वहीं सेना और राजनीतिक नेतृत्व के बीच गहरी दरार भी साफ दिखाई देने लगी है. गाज़ा का संघर्ष अब सिर्फ सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि इसराइल की आंतरिक सत्ता संघर्ष का आईना बन गया है.
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