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Mojtaba Khamenei Photograph: (X)
Iran New Supreme Leader: अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों तथा अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश की सबसे शक्तिशाली धार्मिक संस्था ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुन लिया है. हालांकि, इस फैसले की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है.
असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने लिया फैसला
यूके आधारित मीडिया संस्थान ईरान इंटरनेशनल ने सूत्रों के हवाले से बताया कि 3 मार्च 2026 को यह चुनाव किया गया. उस समय देश युद्ध जैसी स्थिति से गुजर रहा था. 88 वरिष्ठ मौलवियों वाली असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ही ईरान में सर्वोच्च नेता का चुनाव करती है. सुप्रीम लीडर का पद देश की राजनीति, सेना और रणनीतिक मामलों में सबसे अहम माना जाता है.
A Supreme Leader has been killed. A son has been chosen. And the Revolutionary Guards are driving the process.https://t.co/qpT1soj38hpic.twitter.com/yRNBwRBLUT
— Iran International English (@IranIntl_En) March 4, 2026
मोजतबा खामेनेई की उम्र लगभग 56 साल है. वे लंबे समय से पर्दे के पीछे सक्रिय रहे हैं. धार्मिक रूप से वे मध्यम स्तर के मौलवी माने जाते हैं, लेकिन उनकी असली ताकत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) और बसिज फोर्स से उनके करीबी रिश्ते हैं.
विवादों में क्यों घिरा ये फैसला?
यह फैसला इसलिए विवादों में है क्योंकि 1979 की इस्लामिक क्रांति राजशाही खत्म करने के लिए हुई थी. उस क्रांति का मूल सिद्धांत वंशानुगत सत्ता का विरोध था. ऐसे में पिता के बाद बेटे को सर्वोच्च नेता बनाना कई लोगों को राजशाही जैसी परंपरा की याद दिला रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी-इजरायली हमलों के कारण असेंबली की भौतिक बैठक संभव नहीं थी, इसलिए वर्चुअल मीटिंग में यह निर्णय लिया गया. सूत्रों का दावा है कि IRGC ने स्थिरता और सख्त नीतियां जारी रखने के नाम पर मोजतबा के समर्थन में दबाव बनाया.
अब मोजतबा खामेनेई के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी वैधता साबित करने की है. उनके पास अपने पिता जैसा उच्च धार्मिक दर्जा नहीं है, इसलिए उन्हें सत्ता बनाए रखने के लिए सैन्य समर्थन पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस कदम की आलोचना की संभावना जताई जा रही है.
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