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ईरान में रेड फ्लैग क्यों? Photograph: (X/@IranObserver0)
ईरान के पवित्र शहर कोम (Qom) स्थित जमकरन मस्जिद (Jamkaran Mosque) के गुंबद पर ‘बदले का लाल झंडा’ फहराया गया है. यह कदम देश के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की कथित मौत के बाद उठाया गया. लाल झंडे को शोक और प्रतिशोध के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, जिससे समर्थकों में गुस्से का संकेत मिलता है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार खामेनेई की मौत तेहरान में शनिवार को हुए संयुक्त हवाई हमले में हुई. हमले के लिए अमेरिका और इजराइल को जिम्मेदार बताया जा रहा है. ईरानी सरकारी मीडिया ने रविवार को उनकी मौत की पुष्टि की.
अमेरिकी प्रेसिडेंट ने क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान जारी कर कहा कि “खामेनेई, इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक, अब जीवित नहीं हैं.” उन्होंने इसे ईरानी जनता के लिए “अपने देश को वापस लेने का अवसर” बताया. वहीं इज़राइल के प्रधानमंत्री बेनजामिन नेतन्याहू ने कहा कि कई संकेत हैं कि यह तानाशाह अब जीवित नहीं है.” उन्होंने ईरानी नागरिकों से शासन के खिलाफ एकजुट होने की अपील भी की.
तेहरान में विरोध और जश्न का माहौल
रिपोर्टों के अनुसार तेहरान के कुछ हिस्सों में जश्न की आवाजें सुनी गईं, जबकि खामेनेई के निवास क्षेत्र के पास काले धुएं के गुबार देखे गए. IDF ने खामेनेई को “इज़राइल को नष्ट करने की योजना का मुख्य वास्तुकार” बताया और मध्य पूर्व में ईरानी प्रभाव बढ़ाने के प्रयासों का नेतृत्व करने का आरोप लगाया.
अंतरिम नेतृत्व परिषद का गठन
खामेनेई की मौत के बाद ईरान में अंतरिम नेतृत्व संरचना बनाई गई है. ईरानी स्टूडेंट्स न्यूज एजेंसी Iranian Students’ News Agency के अनुसार वरिष्ठ धर्मगुरु अलीरेजा अराफी को तीन सदस्यीय अस्थायी नेतृत्व परिषद में न्यायविद सदस्य नियुक्त किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक यह परिषद राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन और मुख्य न्यायाधीश ग़ुलामहुसैन मोहसनी एजई के साथ मिलकर सर्वोच्च नेता के दायित्व निभाएगी, जब तक कि विशेषज्ञों की सभा स्थायी उत्तराधिकारी का चयन नहीं कर लेती. यह घटनाक्रम मध्य पूर्व में पहले से बढ़े तनाव को और गहरा कर सकता है, जबकि क्षेत्रीय और वैश्विक समुदाय की निगाहें ईरान की आंतरिक राजनीतिक दिशा और संभावित प्रतिक्रियाओं पर टिकी हैं.
🚨🚨 Iran raises the red flag over the Jamkaran Mosque in Qom as a Shia symbol of revenge pic.twitter.com/BtkCfbmbNw
— Iran Observer (@IranObserver0) March 1, 2026
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