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Israel Iran conflict
Israel Iran Conflict: महाराष्ट्र के ठाणे में जन्मी और अब इजराइल की नागरिक बन चुकी एक भारतीय मूल की यहूदी युवती आज भी पिछले साल जून में हुए ईरान–इजराइल के 12 दिन के युद्ध की भयावह यादों से उबर नहीं पाई है. उस युद्ध के दौरान ईरान की ओर से किए गए मिसाइल हमले में उसका अपार्टमेंट पूरी तरह तबाह हो गया था.
मलबे में तब्दील हो गया घर
जिस घर में वह अपने माता-पिता और छोटी बहन के साथ रहती थी, आज वहां सिर्फ मलबा और टूटे हुए कंक्रीट के ढेर बचे हैं. युवती ने न्यूज़ नेशन के संवाददाता राहुल डबास को वह जगह दिखाई, जहां कभी उसका घर हुआ करता था. टूटी दीवारें और बिखरा सामान आज भी उस हमले की दर्दनाक कहानी बयां करते हैं.
युवती ने भावुक होते हुए कहा, 'घर सिर्फ चार दीवारें नहीं होता, उससे जिंदगी की यादें जुड़ी होती हैं. जब उस जगह को देखती हूं तो लगता है सब कुछ खत्म हो गया.'
इजराइली सरकार ने दिया मुआवजा
हमले के बाद इजराइली सरकार ने परिवार को मुआवजा दिया और युद्ध के दौरान होटल में ठहरने की व्यवस्था भी की. लेकिन मानसिक आघात अब भी बना हुआ है. युवती बताती है कि जैसे ही एंबुलेंस का सायरन सुनाई देता है, उसका दिल तेज धड़कने लगता है. उसे लगता है कि फिर से हमला होने वाला है.
बैठ गया है मन में गहरा डर
ईरान की मिसाइलों और ड्रोन हमलों ने उसके मन में गहरा डर बैठा दिया है. उसका कहना है कि अगर फिर से युद्ध हुआ तो शायद कोई भी नागरिक पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहेगा. उसने यह भी कहा कि कई बार ईरान के ड्रोन के सामने इजराइल की सुरक्षा प्रणाली ‘आयरन डोम’ भी पूरी तरह काम नहीं कर पाती, जिससे लोगों में भय और बढ़ जाता है.
पिता लौट चुके हैं भारत
युद्ध के खतरे को देखते हुए उसके पिता भारत लौट चुके हैं. युवती का कहना है, “भारत बहुत सुरक्षित देश है, लेकिन इजराइल में हमेशा खतरे के साए में जीना पड़ता है.” यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उन तमाम लोगों की है जो युद्ध और अनिश्चितता के बीच अपना जीवन जी रहे हैं. हर सायरन की आवाज उनके लिए एक नए डर का संकेत बन जाती है.
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