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मध्य एशिया और पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते युद्ध के असर ने वैश्विक व्यापार तंत्र को हिला दिया है. समुद्री मार्गों पर अस्थिरता, बीमा लागत में उछाल और कंटेनर की कमी ने अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन को प्रभावित किया है. यही वजह है कि भारतीय बाजार में भी हलचलें बढ़ गई हैं. लेकिन सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि भारत सरकार ने इस संकट से निपटने की तैयारी कर ली है. भारत सरकार ने निर्यात-आयात (EXIM) व्यापार की निरंतरता बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है.
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने घोषणा की है कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात की निगरानी और सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समूह (Inter-Ministerial Group) का गठन किया गया है. यह समूह उभरती परिस्थितियों पर लगातार नजर रखेगा और जरूरी समन्वय सुनिश्चित करेगा.
लगातार दो दिनों तक हुई उच्चस्तरीय समीक्षा
वाणिज्य मंत्रालय में लगातार दूसरे दिन प्रमुख स्टेकहोल्डर मंत्रालयों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और व्यापार सुविधा भागीदारों के साथ अहम बैठक हुई. इसमें क्षेत्रीय संघर्ष के भारत के निर्यात और आयात पर संभावित प्रभाव की विस्तृत समीक्षा की गई.
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि सरकार की प्राथमिकता व्यापार प्रवाह को बिना बाधा जारी रखना है. विशेष रूप से एमएसएमई निर्यातकों के हितों की रक्षा और घरेलू उत्पादन के लिए जरूरी आयात की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया.
अंतर-मंत्रालयी समूह में कौन-कौन शामिल
गठित समूह में वित्तीय सेवा विभाग, विदेश मंत्रालय, जहाजरानी, बंदरगाह और जलमार्ग मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टमके वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं.
इसका मुख्य उद्देश्य है:
- हालात की सक्रिय निगरानी
- विभिन्न मंत्रालयों के बीच त्वरित समन्वय
- निर्यात-आयात सप्लाई चेन की मजबूती
- जोखिम प्रबंधन और त्वरित निर्णय
सरकार का मानना है कि बहु-आयामी संकट से निपटने के लिए समन्वित और त्वरित निर्णय प्रणाली जरूरी है.
व्यापार को सुचारु रखने के लिए उठाए गए कदम
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, सरकार ने कई स्तरों पर पहल शुरू की है:
अप्रूवल प्रक्रिया में लचीलापनः यदि किसी कारण से व्यापार बाधित होता है तो एक्सपोर्ट-संबंधी अनुमोदन प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया जाएगा.
सीमा शुल्क समन्वयः एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट कन्साइनमेंट की शीघ्र क्लीयरेंस के लिए कस्टम अधिकारियों के साथ तालमेल बढ़ाया गया है.
वित्तीय और बीमा संस्थानों से संवादः निर्यातकों के हितों की सुरक्षा के लिए बीमा और बैंकिंग संस्थाओं के साथ निरंतर बातचीत जारी है.
निरंतर समन्वय तंत्रः सभी स्टेकहोल्डर मंत्रालयों के बीच नियमित संवाद और अपडेट साझा किए जा रहे हैं.
लॉजिस्टिक्स और बीमा पर असर
मध्य एशिया क्षेत्र में तनाव के कारण जहाजों के रूट और शेड्यूलिंग में बदलाव हो रहा है. कई समुद्री मार्ग सामरिक दृष्टि से संवेदनशील हो गए हैं. इससे ट्रांजिट समय बढ़ गया है और माल ढुलाई लागत में तेज उछाल देखा जा रहा है. बीमा प्रीमियम में भी वृद्धि हुई है, खासकर उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों के लिए.
बैठक में कंटेनर और उपकरणों की उपलब्धता पर भी चर्चा हुई. सरकार ने संकेत दिया है कि आवश्यक वस्तुओं और संवेदनशील उत्पादों के लिए विशेष व्यवस्था बनाई जा सकती है.
जल्दी खराब होने वाले सामानों के लिए विशेष तंत्र
परिस्थितियों को देखते हुए जल्दी खराब होने वाले उत्पाद जैसे, दवाइयों और हाई वैल्यू सामानों के लिए विशेष मैकेनिज्म विकसित करने पर विचार किया गया है. इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि आवश्यक चिकित्सा आपूर्ति और खाद्य उत्पाद समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचें.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो भारत और मध्य एशिया के देशों के बीच होने वाला अरबों डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार प्रभावित हो सकता है। इसलिए अग्रिम रणनीति अपनाना जरूरी है.
निर्यातकों के लिए हेल्पलाइन
वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यातकों और आयातकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन भी जारी की है:
- ईमेल: adg1-dgft@gov.in
- टोल-फ्री नंबर: 1800-572-1550, 1800-111-550
सरकार ने व्यापार समुदाय से अपील की है कि वे किसी भी समस्या की तुरंत सूचना दें ताकि त्वरित समाधान किया जा सके.
सप्लाई चेन रेजिलिएंस पर फोकस
मौजूदा वैश्विक हालात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मजबूत और लचीली सप्लाई चेन किसी भी देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य है. भारत सरकार का फोकस केवल मौजूदा संकट से निपटना नहीं, बल्कि भविष्य के जोखिमों के लिए भी तैयार रहना है.
अंतर-मंत्रालयी समूह के गठन के साथ यह संकेत साफ है कि भारत व्यापार प्रवाह को सुरक्षित रखने और वैश्विक बाजार में अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए हरसंभव कदम उठाने को तैयार है.
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