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जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने रविवार (19 जनवरी) को ग्रीनलैंड मुद्दे पर अमेरिका को साफ संदेश देते हुए कहा कि जर्मनी डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है. उन्होंने चेतावनी दी कि टैरिफ की धमकियां अमेरिका और यूरोप के बीच रिश्तों को कमजोर करती हैं और इससे हालात “खतरनाक मोड़” पर पहुंच सकते हैं.
Stand united and coordinated with Denmark and people of Greenland: German Chancellor Merz
— ANI Digital (@ani_digital) January 18, 2026
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मर्ज ने सोशल मीडिया पर किया पोस्ट
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए मर्ज ने कहा कि नाटो के सदस्य होने के नाते जर्मनी आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा को साझा अंतर-अटलांटिक हित मानता है. उन्होंने साफ कहा कि व्यापारिक दबाव और टैरिफ जैसे कदम सहयोग की भावना के खिलाफ हैं.
We stand united and coordinated with Denmark and the people of Greenland. As a member of NATO, we are committed to strengthening Arctic security as a shared transatlantic interest. Tariff threats undermine transatlantic relations and risk a dangerous downward spiral.
— Bundeskanzler Friedrich Merz (@bundeskanzler) January 18, 2026
इससे पहले, रविवार को कई यूरोपीय देशों ने एकजुट होकर डेनमार्क और ग्रीनलैंड के समर्थन में बयान जारी किया. डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम ने कहा कि ‘आर्कटिक एंड्योरेंस’ सैन्य अभ्यास किसी के लिए खतरा नहीं है और ये देश डेनमार्क व ग्रीनलैंड के लोगों के साथ पूरी एकजुटता में खड़े हैं.
Joint statement by Denmark, Finland, France, Germany, the Netherlands, Norway, Sweden, and the United Kingdom 👇 pic.twitter.com/Gxf3F1Dc3p
— Denmark MFA 🇩🇰 (@DanishMFA) January 18, 2026
ट्रंप की टैरिफ वाली धमकी
बता दें कि तनाव की वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वह धमकी है, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर ग्रीनलैंड को अमेरिका को बेचने पर सहमति नहीं बनी, तो यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ लगाए जाएंगे. ट्रंप ने ऐलान किया कि 1 फरवरी 2026 से 10 फीसदी और 1 जून 2026 से 25 फीसदी तक टैरिफ बढ़ाए जाएंगे.
ट्रंप का दावा है कि ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति और खनिज संसाधन अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी हैं. हालांकि, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने इस मांग को खारिज करते हुए आत्मनिर्णय के अधिकार पर जोर दिया है. यूरोप में इस विवाद को लेकर नाटो की एकता पर भी सवाल उठने लगे हैं.
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