/newsnation/media/media_files/2026/03/06/inflation-in-indian-amid-war-2026-03-06-19-41-53.jpg)
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के उद्योगों पर भी दिखने लगा है. वैसे तो देशभर में लोगों की चिंता का बड़ा कारण पेट्रोल-डीजल या फिर गैस की कीमतों को लेकर बना हुआ है. लेकिन आपको बता दें कि फिलहाल इनकी कीमतों में तेजी नहीं देखने को मिली है. लेकिन इसके अलावा कई ऐसी चीजें हैं जिनके दामों में उछाल आ गया है. खास तौर पर अगर आप अपना घर बना रहे हैं तो आपकी लागत काफी बढ़ सकती है. आइए जानते हैं कि युद्ध के बीच भारत में किन चीजों की कीमतों में उछाल आया है.
युद्ध के बीच भारत में महंगी हुई ये चीजें
इजरायल-ईरान युद्ध का असर अब भारत के कई उत्पादों में देखने को मिल रहा है. खास तौर पर प्लास्टिक और धातु उद्योग इससे प्रभावित हो रहे हैं. कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने और कीमतों में तेजी के कारण कई औद्योगिक इकाइयों की लागत बढ़ गई है. हाल के दिनों में Polyvinyl Chloride (पीवीसी) रेजिन की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे पाइप, फिटिंग, केबल, प्रोफाइल और प्लास्टिक शीट बनाने वाली इकाइयों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है.
आपूर्ति बाधित होने से बढ़ी कच्चे माल की कीमत
व्यापारियों के अनुसार, पीवीसी का निर्माण मुख्य रूप से खनिज तेल से तैयार होने वाले पेट्रोकेमिकल उत्पादों से होता है. लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव के कारण समुद्री मार्गों पर असर पड़ा है. खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास बढ़ी अस्थिरता के चलते कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है.
बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र में स्थिति अस्थिर होने के कारण भारत आने वाले कई टैंकरों की आवाजाही धीमी हो गई है. इससे खनिज तेल और उससे बनने वाले उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हुई है. नतीजतन बाजार में उपलब्ध स्टॉक सीमित हो गया है और जो नया माल आ रहा है वह पहले से अधिक कीमत पर मिल रहा है.
पीवीसी की कीमतों में तेज उछाल
व्यापारियों का कहना है कि फरवरी के अंत तक पीवीसी ऑयल लगभग 45 रुपये प्रति किलो के आसपास उपलब्ध था, लेकिन अब इसकी कीमत बढ़कर करीब 58 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. इसी तरह पीवीसी के दानों की कीमत भी 73 रुपये प्रति किलो से बढ़कर करीब 90 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है.
इस अचानक आई महंगाई ने उद्योगों के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है. जिन कंपनियों ने पहले कम कीमत पर ऑर्डर लिए थे, उन्हें अब बढ़ी लागत के कारण कई ऑर्डर रद्द करने पड़ रहे हैं. इससे व्यापारियों और निर्माताओं दोनों पर दबाव बढ़ गया है.
एमएसएमई इकाइयों में बढ़ी सतर्कता
नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में कई छोटी और मध्यम उद्योग इकाइयों ने नए ऑर्डर लेने में सावधानी बरतनी शुरू कर दी है. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर कच्चे माल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो उत्पादन लागत और बढ़ जाएगी.
इसका असर निर्माण क्षेत्र और अन्य उद्योगों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि पीवीसी का इस्तेमाल बड़ी संख्या में निर्माण सामग्री बनाने में होता है. यदि कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो निर्माण परियोजनाओं की गति भी प्रभावित हो सकती है.
क्या है पीवीसी और क्यों है इतना महत्वपूर्ण
पीवीसी एक महत्वपूर्ण पॉलिमर है जिसका इस्तेमाल कई उद्योगों में किया जाता है. इसे मुख्य रूप से एथिलीन और क्लोरीन जैसे रसायनों से तैयार किया जाता है, जिनका स्रोत पेट्रोलियम या प्राकृतिक गैस होती है.
निर्माण क्षेत्र में पीवीसी से बने पाइप, दरवाजे-खिड़कियां, केबल कवर, फ्लोरिंग शीट और कई अन्य उत्पाद व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं. इसके अलावा चिकित्सा उपकरणों और पैकेजिंग उद्योग में भी इसका महत्वपूर्ण स्थान है.
लोहे और सरिया के दाम भी बढ़े
सिर्फ प्लास्टिक उद्योग ही नहीं, बल्कि धातु उद्योग भी महंगाई की मार झेल रहा है. लोहा व्यापारियों के मुताबिक सरिया और अन्य लोहे के उत्पादों की कीमतों में भी तेजी आई है.
कुछ समय पहले तक गार्टर सरिया की कीमत करीब 43 रुपये प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर लगभग 48 रुपये प्रति किलो हो गई है। इस पर लागू जीएसटी के कारण अंतिम कीमत और अधिक हो जाती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक हालात जल्दी सामान्य नहीं हुए तो कच्चे माल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जिसका असर कई उद्योगों और निर्माण गतिविधियों पर पड़ सकता है.
यह भी पढ़ें - लंबा चला युद्ध तो भारत समेत इस देश के बढ़ जाएगी मुसीबत, जानें क्यों?
/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
Follow Us