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brigitte macron
Paris: फ्रांस की राजधानी पेरिस की एक अदालत ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पत्नी और फर्स्ट लेडी ब्रिगिट मैक्रों के खिलाफ ऑनलाइन उत्पीड़न के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने सोशल मीडिया पर झूठी और आपत्तिजनक अफवाहें फैलाने के आरोप में 10 लोगों को दोषी ठहराया है. इन लोगों पर आरोप था कि उन्होंने ब्रिगिट मैक्रों के लिंग को लेकर झूठे दावे किए और उन्हें पुरुष बताने की अफवाहें फैलाईं.
क्या मैक्रों पहले पुरुष थीं
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैलायी जा रही थी कि ब्रिगिट मैक्रों पुरुष के रूप में जन्मी थीं और उनका नाम जीन-मिशेल ट्रोगन्यूक्स था. जबकि जीन-मिशेल ट्रोगन्यूक्स ब्रिगिट मैक्रों के बड़े भाई का नाम है. इन अफवाहों को लेकर ब्रिगिट मैक्रों ने साल 2024 में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी.
दोषियों में महिला और पुरुष शामिल
अदालत ने बताया कि दोषियों में आठ पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं, जिनकी उम्र 41 से 65 साल के बीच है. तीन आरोपी अदालत में पेश नहीं हुए. सभी दोषियों को अलग-अलग सजाएं दी गई हैं. कोर्ट ने इन्हें 8 महीने की जेल और करीब 63 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है.
अफवाहों पर मैक्रों की बेटी की गवाही
मामले की सुनवाई के दौरान ब्रिगिट मैक्रों की बेटी टिफेन ऑजियर ने गवाही दी. उन्होंने कहा कि इन अफवाहों का उनकी मां की सेहत और पूरे परिवार पर बुरा असर पड़ा है. बच्चों और पोते-पोतियों के लिए यह सब सुनना बेहद तकलीफदेह रहा.
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क्या ये सब मजाक था?
कुछ आरोपियों ने अदालत में दलील दी कि उन्होंने यह सब मजाक में किया था. एक आरोपी ने कहा कि ब्रिगिट मैक्रों एक प्रभावशाली शख्सियत हैं, इसलिए उन्हें आलोचना सहन करनी चाहिए. हालांकि अदालत ने साफ कहा कि किसी की पहचान और सम्मान पर हमला करना मजाक नहीं हो सकता.
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