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Bangladesh Violence: बांग्लादेश में 2024 के जुलाई आंदोलन के दौरान बने जन-सांस्कृतिक संगठन इंकलाब मंचो ने अपने संयोजक शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है. संगठन ने कहा है कि वह 3 जनवरी से 6 जनवरी तक ‘मार्च फॉर जस्टिस’ निकालेगा और हादी की हत्या के दोषियों को सजा दिलाने की मांग करेगा.
उस्मान हादी की हुई थी हत्या
आपको बता दें कि शरीफ उस्मान हादी जुलाई 2024 के आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे. इसी आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हुई थी. हादी को 12 दिसंबर 2025 को ढाका के बिजॉय नगर इलाके में उस समय गोली मार दी गई थी, जब वे रिक्शा से जा रहे थे. गोली बेहद करीब से मारी गई थी. इलाज के दौरान उनकी हालत गंभीर बनी रही और 18 दिसंबर को उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.
इंकलाब मंचो की मुख्य मांगें
संगठन ने सरकार से साफ शब्दों में मांग की है कि हादी की हत्या में शामिल सभी लोगों की पहचान की जाए. साथ ही 7 जनवरी तक इस मामले में चार्जशीट दाखिल की जाए और जांच प्रक्रिया को तेज किया जाए. इंकलाब मंचो ने चेतावनी दी है कि अगर तय समय सीमा के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
Bangladesh: Inqilab Moncho to hold 'March for Justice' from Jan 3 to demand justice for Sharif Osman Hadi
— ANI Digital (@ani_digital) January 2, 2026
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सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति
मार्च के दौरान संगठन के सदस्य सरकार से संपर्क करेंगे, राजनीतिक दलों से समर्थन मांगेंगे और देश के दूर-दराज इलाकों में जाकर आम लोगों को आंदोलन से जोड़ेंगे. इससे पहले 2 जनवरी को इंकलाब मंचो ने ढाका के शाहबाग इलाके में सड़क जाम कर प्रदर्शन किया था. प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने अंतरिम सरकार को याद दिलाया कि जांच के लिए दी गई 30 दिन की समय सीमा में से अब सिर्फ 22 दिन बचे हैं.
सरकार को कड़ी चेतावनी
रैली को संबोधित करते हुए संगठन के सदस्य सचिव अब्दुल्ला अल जाबेर ने कहा कि अगर सरकार समय पर न्याय नहीं दिला पाई, तो उसे सत्ता में रहने का नैतिक अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था और जांच एजेंसियों की विफलता कमजोर सरकार की निशानी है.
फिर बड़े आंदोलन की आशंका
इन चेतावनियों के बाद सवाल उठ रहा है कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो क्या बांग्लादेश एक बार फिर बड़े राजनीतिक आंदोलन की ओर बढ़ सकता है. फिलहाल, सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है.
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