क्रूड की बढ़ती कीमतों के बीच G7 के वित्त मंत्रियों की बैठक, आपातकालीन तेल भंडार को लेकर हो सकता है ये फैसला

Crude Oil Emergency Reserve: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच अब आपातकालीन रिजर्व से क्रूड निकासी की चर्चा तेज हो गई है. दरअसल, मध्य पूर्व के हालातों के बीच जी7 के वित्त मंत्रियों की बैठक होने वाली है.

Crude Oil Emergency Reserve: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच अब आपातकालीन रिजर्व से क्रूड निकासी की चर्चा तेज हो गई है. दरअसल, मध्य पूर्व के हालातों के बीच जी7 के वित्त मंत्रियों की बैठक होने वाली है.

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Suhel Khan
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क्या खुलने वाला है आपातकालीन क्रूड रिजर्व? Photograph: (AI)

Crude Oil Emergency Reserve: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच ग्रुप ऑफ सेवन (G7) के वित्त मंत्रियों की बैठक होने जा रही है. जिसमें आपातकालीन भंडार से तेल निकालने को लेकर फैसला लिया जा सकता है. फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में मामले के जानकारों का हवाला देते हुए कहा गया है कि इस प्रस्ताव में अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के माध्यम से रणनीतिक भंडार की संयुक्त रूप से रिहाई शामिल होगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि अब तक, अमेरिका समेत तीन जी7 सदस्यों ने इस विचार का समर्थन किया है. बताया जा रहा है कि अन्य सदस्य समन्वित कदम उठाने से पहले बाजार की स्थितियों का आकलन कर रहे हैं.

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अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर फतिह बिरोल भी इस बैठक में शामिल होंगे. इस बैठक के दौरान ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर ईरान युद्ध के असर पर भी चर्चा की जाएगी. इस बैठक से जुड़े सदस्यों के मुताबिक, अमेरिका समेत तीन G7 देशों ने अब तक स्ट्रेटेजिक रिजर्व से तेल रिलीज यानी निकालने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है.

आपातकालीन रिजर्व से कितना निकल सकता है तेल?

इसके साथ ही कुछ अमेरिकी पॉलिसीमेकर्स का कहना है कि आपातकालीन क्रूड रिजर्व से करीब 300 मिलियन से 400 मिलियन बैरल तेल को सहमति के आधार पर निकाला जा सकता है. यह आईईए (IEA) सदस्य देशों के स्ट्रेटेजिक रिजर्व में रखे लगभग 1.2 बिलियन बैरल तेल का करीब 25 से 30 प्रतिशत होगा. बता दें कि मध्य पूर्व में जारी जंग के चलते कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. सोमवार को एशियाई ट्रेडिंग के दौरान इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 24 प्रतिशत उछाल दर्ज किया गया. इसके बाद ये 116.71 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. जबकि WTI  क्रूड की कीमत में 28 फीसदी की तेजी दर्ज की गई और ये 116.45 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.

वैश्विक बाजार में अस्थिरता

बता दें कि क्रूड की कीमतों में भारी उछाल के चलते ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में भी उतार-चढ़ाव बढ़ गया है. सोमवार को कई एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई. जबकि यूएस स्टॉक मार्केट फ्यूचर्स में भी खुलने से पहले बड़ी गिरावट के संकेत मिले. अमेरिका में भी कच्चे तेल की कीमतों पर  दबाव बढ़ गया है. रविवार तक अमेरिका में गैसोलीन की औसत कीमत 3.45 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई, जो एक हफ्ते पहले 2.98 डॉलर प्रति गैलन थी.

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच आया ट्रंप का बड़ा बयान

क्रूड की बढ़ती कीमतों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया. ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट किया. जिसमें उन्होंने लिखा, "ईरान का न्यूक्लियर खतरा खत्म होने के बाद शॉर्ट-टर्म तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी. यह अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा और शांति के लिए चुकाई जाने वाली एक छोटी सी कीमत है." रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अगर क्रूड की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इससे ग्लोबल महंगाई बढ़ सकती है और इकोनॉमिक ग्रोथ को खतरा पैदा हो सकता है.

भारत समेत इन देशों पर पड़ सकता है सबसे ज्यादा असर

बता दें कि क्रूड की कीमतों में बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर चीन, भारत, दक्षिण कोरिया, जापान, जर्मनी, इटली और स्पेन पर सबसे ज्यादा पड़ने की संभावना है. क्योंकि ये वे देश हैं जो बड़े तेल इंपोर्ट वाले देशों की सूची में शामिल हैं. ये सभी देश इंपोर्टेड एनर्जी पर निर्भर हैं. बता दें कि साल 1974 में इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की स्थापना की गई थी. उसके साथ ही इमरजेंसी तेल रिजर्व का निर्माण किया गया था.
आपातकालीन तेल रिजर्व की पहल अरब तेल बैन के बाद शुरू की गई थी, जिससे दुनिया भर में तेल की भारी कमी पैदा हो गई थी. कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी होने लगी. उसके बाद आईईए के सदस्य देशों को सप्लाई में गंभीर रुकावट की स्थिति में इस्तेमाल के लिए स्ट्रेटेजिक तेल रिजर्व बनाए रखने का आदेश दिया गया.
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