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अमेरिका न्यू वीजा पॉलिसी Photograph: (ai)
अगर आप आने वाले दिनों में अमेरिका जाने का सपना देख रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति ने पूरी दुनिया के यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है. चाहे आप घूमने जा रहे हों या काम के सिलसिले में, अब अमेरिका का वीजा पाना और वहां एंट्री करना अब एक टेढ़ी खीर साबित की तरह है. ट्रंप प्रशासन ने कुछ ऐसे कड़े आदेश जारी किए हैं, जिनका असर सिर्फ दुश्मनों पर ही नहीं, बल्कि अमेरिका के सबसे करीबी दोस्तों (कनाडा और ऑस्ट्रेलिया) पर भी पड़ रहा है.
अब पड़ोसी के लिए भी 'नो एंट्री' जैसा माहौल
भारत समेत कई देशों के लोग कनाडा के रास्ते अमेरिका जाने की प्लानिंग करते हैं, लेकिन अब वहां भी मुश्किलें बढ़ गई हैं. पहले कनाडा और अमेरिका की सीमा को दुनिया की सबसे आसान सरहद माना जाता था, पर अब वहां सुरक्षा के नाम पर पहरा सख्त है. कनाडा के जो प्रोफेशनल लोग 'TN वीजा' पर अमेरिका काम करने जाते थे, उनसे अब ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं जैसे वे किसी अपराधी की श्रेणी में हों. बॉर्डर पर हर गाड़ी की बारीकी से तलाशी ली जा रही है, जिससे घंटों का जाम लग रहा है. इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप कनाडा के नागरिक भी हैं, तो भी अमेरिका आपको शक की निगाह से देख रहा है.
आपकी फेसबुक-इंस्टाग्राम पर रहेगी सरकार की नजर
यूरोपीय देशों के लिए ट्रंप सरकार ने जो नियम बनाया है, वह सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है. अब यूरोप से अमेरिका जाने वाले हर व्यक्ति को अपनी 'सोशल मीडिया कुंडली' खोलनी होगी. नियम के मुताबिक, आपको पिछले 5 साल की अपनी सोशल मीडिया हिस्ट्री, पुरानी ईमेल आईडी और फोन नंबर की जानकारी अमेरिकी दूतावास को देनी होगी.
यानी, अगर आपने पुराने समय में अमेरिका के खिलाफ कोई पोस्ट की है या किसी विवादित मुद्दे पर अपनी राय दी है, तो आपका वीजा रिजेक्ट हो सकता है. इसके अलावा, अब यूरोप के लोगों को भी एयरपोर्ट पर फिंगरप्रिंट और फोटो (बायोमेट्रिक्स) अनिवार्य रूप से देने होंगे.
वेनेजुएला के लिए दरवाजे पूरी तरह बंद
वेनेजुएला के नागरिकों के लिए तो स्थिति बहुत ही खराब हो गई है. ट्रंप प्रशासन ने इस देश को 'हाई रिस्क' कैटेगरी में डाल दिया है. इसका नतीजा यह है कि अब वहां के लोग न तो अमेरिका में बसने के लिए वीजा ले सकते हैं और न ही घूमने के लिए. छात्रों और एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत आने वाले लोगों पर भी बैन लगा दिया गया है। जो लोग मानवीय आधार पर अमेरिका में शरण लेना चाहते थे, उनके लिए भी अब रास्ते बंद हैं. यह उन हजारों परिवारों के लिए एक बड़ा झटका है जो वेनेजुएला के खराब हालातों से बचने के लिए अमेरिका को अपनी आखिरी उम्मीद मान रहे थे.
ऑस्ट्रेलिया के लिए भी ठीक नहीं
ऑस्ट्रेलिया हमेशा से अमेरिका का एक मजबूत साथी रहा है, लेकिन नए नियमों ने उसे भी नहीं बख्शा. ऑस्ट्रेलियाई लोगों के लिए एक खास वीजा होता है जिसे 'E-3 वीजा' कहते हैं. पहले यह बहुत आसानी से मिल जाता था, लेकिन अब इसकी जांच इतनी कड़ी कर दी गई है कि महीनों का समय लग रहा है. ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को भी अब वही सब डेटा शेयर करना पड़ रहा है जो यूरोप के लोगों के लिए अनिवार्य है. दूतावास अब हर आवेदक के पारिवारिक संबंधों की भी जांच कर रहा है कि कहीं उनका संबंध किसी संदिग्ध संगठन से तो नहीं है.
भारतीयों और ग्लोबल यात्रियों के लिए इसका क्या मतलब है?
हालांकि ये नियम फिलहाल इन खास देशों पर केंद्रित दिख रहे हैं, लेकिन इनका असर व्यापक है. जब अमेरिका अपने सबसे करीबी सहयोगियों (कनाडा और ऑस्ट्रेलिया) के लिए इतने सख्त नियम बना सकता है, तो भारत जैसे देशों के लिए आने वाले समय में चुनौतियां और बढ़ सकती हैं. भारतीय आईटी प्रोफेशनल जो H-1B वीजा पर जाते हैं, उन्हें भी भविष्य में इसी तरह की 'सोशल मीडिया स्क्रूटनी' और 'एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेसिंग' का सामना करना पड़ सकता है.
इसका असर क्या होगा?
अब सवाल यह है कि जिन देशों पर ये सख्ती लगाई गई हैं, उन पर इनका क्या प्रभाव पड़ेगा. देखिए सबसे बड़ा और भावनात्मक असर उन परिवारों पर पड़ेगा जिनके सदस्य अलग-अलग देशों में रहते हैं. वेनेजुएला जैसे देशों पर लगे 'इमिग्रेंट वीजा बैन' का मतलब है कि अब लोग अपने परिवार से मिलने या उन्हें अमेरिका बुलाने के लिए तरस जाएंगे. शादियों, गंभीर बीमारी या अन्य पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होना अब लगभग नामुमकिन हो जाएगा, जिससे मानसिक तनाव और सामाजिक दूरी बढ़ेगी.
कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के प्रोफेशनल्स (TN और E-3 वीजा होल्डर) अमेरिका की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देते हैं. सख्त जांच और देरी के कारण अमेरिकी कंपनियां इन देशों के टैलेंट को हायर करने से कतराएंगी. इससे अमेरिका के टेक और रिसर्च सेक्टर में गिरावट आ सकती है. वहीं, यूरोप के यात्रियों पर सोशल मीडिया और डेटा शेयरिंग की शर्तों से बिजनेस ट्रिप्स कम हो जाएंगी, जिसका सीधा असर पर्यटन उद्योग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर पड़ेगा.
कूटनीतिक संबंधों में कड़वाहट
जब अमेरिका अपने करीबी दोस्तों (जैसे कनाडा और ऑस्ट्रेलिया) के नागरिकों पर शक करता है, तो जवाब में वे देश भी अमेरिकी नागरिकों के लिए नियम कड़े कर सकते हैं. इसे 'वीजा वॉर' कहा जाता है. इससे देशों के बीच दशकों पुराने भरोसे में कमी आएगी और भविष्य के सैन्य या व्यापारिक समझौतों में रुकावट पैदा हो सकती है. मतलब अब अमेरिका जाने का मतलब सिर्फ पासपोर्ट और टिकट नहीं, बल्कि आपके डिजिटल फुटप्रिंट (इंटरनेट पर आपकी मौजूदगी) का पूरी तरह साफ-सुथरा होना भी जरूरी है.
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