AI की एक चूक और बिगड़ी ज़िंदगी, ब्रिटेन में मशीन की गलती से निर्दोष बुजुर्ग पर लगा चोरी का आरोप, जानिए क्या है मामला

ब्रिटेन में एआई फेस रिकग्निशन सिस्टम की गलती से एक निर्दोष बुजुर्ग को स्टोर में चोर समझ लिया गया. कंपनी ने माफी मांगकर उनका डेटा हटाया, घटना ने एआई सुरक्षा की सटीकता पर सवाल खड़े किए.

ब्रिटेन में एआई फेस रिकग्निशन सिस्टम की गलती से एक निर्दोष बुजुर्ग को स्टोर में चोर समझ लिया गया. कंपनी ने माफी मांगकर उनका डेटा हटाया, घटना ने एआई सुरक्षा की सटीकता पर सवाल खड़े किए.

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Akansha Thakur
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UK AI Controversy

UK AI Controversy

UK AI Controversy: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तकनीक को भविष्य की सबसे भरोसेमंद प्रणाली माना जा रहा है. लेकिन हाल ही में ब्रिटेन में हुए एक घटना ने इस भरोसे को बड़ा झटका दिया है. यहां एक स्टोर में AI आधारित सुरक्षा सिस्टम की गलती से एक निर्दोष बुजुर्ग को चोर समझ लिया गया. इस गलत पहचान के कारण उन्हें स्टोर में सबके सामने अपमानित होना पड़ा. इस घटना ने एआई सुरक्षा की सटीकता पर सवाल खड़े कर दिए है. चलिए जानते हैं आखिर क्या है पूरा मामला? 

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AI सिस्टम की वजह से बुजुर्ग पर लगा चोरी का आरोप 

जानकारी के अनुसार, स्टोर में लगे फेस रिकग्निशन सिस्टम ने बुजुर्ग व्यक्ति के चेहरे को पहले से दर्ज एक अपराधी के डेटा से जोड़ दिया. जैसे ही सिस्टम ने अलर्ट जारी किया, स्टोर स्टाफ ने बुजुर्ग पर चोरी का शक जताया, लोगों के सामने उनसे सवाल-जवाब किए गए. यह स्थिति उनके लिए बेहद शर्मनाक और मानसिक रूप से परेशान करने वाली थी.

बुजुर्ग ने खुद को बताया निर्दोष 

बुजुर्ग ने खुद को निर्दोष बताया. बाद में जांच करने पर पता चला कि एआई सिस्टम ने चेहरे की पहचान में गंभीर गलती की थी. आरोपी व्यक्ति और बुजुर्ग के चेहरे में कुछ समानताएं थीं. इसी आधार पर सिस्टम ने गलत निष्कर्ष निकाल लिया.

मामला सामने आने के बाद संबंधित कंपनी ने अपनी गलती स्वीकार की. कंपनी ने बुजुर्ग से औपचारिक रूप से माफी मांगी. साथ ही उनका पूरा बायोमेट्रिक डेटा सिस्टम से हटाने का दावा किया गया. कंपनी ने कहा कि वह भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए अपने एआई मॉडल को और बेहतर बनाएगी.

एआई सुरक्षा की सटीकता पर खड़े किए सवाल 

यह घटना एआई आधारित सुरक्षा प्रणालियों की सटीकता पर बड़े सवाल खड़े करती है. विशेषज्ञों का कहना है कि फेस रिकग्निशन तकनीक अभी पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है. खासतौर पर बुजुर्गों और अल्पसंख्यक समूहों के मामले में गलत पहचान की आशंका ज्यादा रहती है.

सरकार और कंपनियों से की जा रही है मांग

मानव अधिकार संगठनों ने भी इस मामले पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि बिना पुख्ता निगरानी और जवाबदेही के एआई सिस्टम आम लोगों की निजता और सम्मान के लिए खतरा बन सकते हैं.

सरकार और कंपनियों से मांग की जा रही है कि एआई तकनीक के इस्तेमाल से पहले सख्त नियम बनाए जाएं. साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी निर्दोष व्यक्ति को मशीन की गलती की कीमत न चुकानी पड़े.

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