विदेशी महिला के साथ लोगों ने ये कैसे खेल ली होली, देखें वीडियो

वृंदावन में होली मनाने आई ऑस्ट्रिया की महिला ब्रिता ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर आरोप लगाया कि भीड़ ने उनके साथ बदसलूकी की और उनकी आंखों में पत्थर मिला गुलाल फेंक दिया. वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा और चिंता देखने को मिल रही है.

वृंदावन में होली मनाने आई ऑस्ट्रिया की महिला ब्रिता ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर आरोप लगाया कि भीड़ ने उनके साथ बदसलूकी की और उनकी आंखों में पत्थर मिला गुलाल फेंक दिया. वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा और चिंता देखने को मिल रही है.

author-image
Ravi Prashant
New Update
holi viral

वायरल होली वीडियो Photograph: (IG/breeandthelove)

सोशल मीडिया पर होली से जुड़े कई वीडियो देखने को मिल रहे हैं, कुछ वीडियो शानदार हैं तो कई वीडियो इंसान को सोचने पर मजबूर कर दे रहा है. हम आपके साथ एक ऐसा ही वीडियो शेयर करने जा रहे हैं, जिसे देखने के बाद आपको गुस्सा भी आ सकता है. दरअसल, ब्रिता ऑस्ट्रिया की रहने वाली हैं और बड़ी उम्मीदों के साथ भारत में होली देखने आईं थीं. लेकिन उनके साथ जो हुआ, उसने त्योहार की खुशी को डर में बदल दिया. आइए जानते हैं कि वृंदावन की गलियों में उनके साथ क्या बीता और क्यों आज सोशल मीडिया पर इस घटना की इतनी चर्चा हो रही है?

Advertisment

सपनों जैसा आगा और फिर डरावना मोड़

ब्रिता जब वृंदावन पहुंचीं, तो शुरुआत में उन्हें सब कुछ जादू जैसा लगा. उन्होंने अपने वीडियो में बताया कि कैसे उन्होंने रंग-बिरंगे स्कार्फ खरीदे, भांग का स्वाद चखा, बंदरों की शरारतें देखीं और मंदिरों के दर्शन किए. चारों तरफ 'राधे-राधे' की गूंज और होली की जबरदस्त एनर्जी थी. ब्रिता को लगा कि यह उनके जीवन का सबसे यादगार अनुभव होने वाला है.

लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ा, नजारा बदलने लगा. जो भीड़ पहले भक्ति में डूबी दिख रही थी, वो अब बेकाबू होने लगी थी. ब्रिता कहती हैं कि महिलाओं के लिए यह अनुभव बिल्कुल भी सुखद नहीं रहा. अनजान लोग जबरदस्ती रंग डाल रहे थे और भीड़ का फायदा उठाकर बदतमीजी कर रहे थे.

आंखों में पत्थर और खतरनाक गुलाल

ब्रिता के साथ सबसे बुरा तब हुआ जब वो सड़क से गुजर रही थीं. अचानक किसी ने उनकी आंखों में सीधा गुलाल फेंका. लेकिन वह सिर्फ रंग नहीं था. उस गुलाल में छोटे-छोटे पत्थर मिले हुए थे. ब्रिता बताती हैं कि पत्थर सीधे उनकी आंखों में लगे और जलन इतनी तेज थी कि उन्हें कुछ भी दिखाई देना बंद हो गया. वो सड़क पर ही रोने लगीं और किसी तरह अपनी आंखों को साफ किया. इस घटना को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन ब्रिता का कहना है कि उनकी आंखों की रोशनी अभी भी धुंधली है. एक त्योहार जो प्यार के लिए जाना जाता है, वहां इस तरह की हिंसा ने उन्हें अंदर तक हिला कर रख दिया.

सोशल मीडिया पर फूट पड़ा लोगों का गुस्सा

जब ब्रिता ने अपनी आपबीती इंस्टाग्राम पर शेयर की, तो देखते ही देखते उनका वीडियो वायरल हो गया. हजारों भारतीयों ने उनके पोस्ट पर कमेंट किया और उनसे माफी मांगी. लोगों ने कहा कि भारत की संस्कृति मेहमानों का सम्मान करना सिखाती है, न कि उन्हें चोट पहुंचाना.

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उन्हें सलाह दी कि भारत में भी बहुत सी महिलाएं सड़कों पर होली खेलने से बचती हैं. ज्यादातर लोग अपने घर के आंगन में या जान-पहचान के लोगों के साथ ही होली मनाना पसंद करते हैं, क्योंकि सड़कों पर हुड़दंगियों का डर बना रहता है.

'बुरा न मानो होली है' की आड़ में छिपी गंदगी

सालों से हम यह जुमला सुनते आ रहे हैं. 'बुरा न मानो होली है'. लेकिन अब विदेशी पर्यटकों के साथ हो रही इन घटनाओं ने इस कहावत पर सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या इस एक लाइन के पीछे किसी को भी चोट पहुंचाने या महिलाओं के साथ बदतमीजी करने की छूट मिल जाती है?

ब्रिता अकेली नहीं हैं. पिछले कुछ दिनों में कई ऐसे वीडियो सामने आए हैं जहां विदेशी सैलानियों को घेरकर उन पर जबरदस्ती रंग डाला गया या उनके साथ धक्का-मुक्की की गई. जब ये वीडियो दुनिया भर में देखे जाते हैं, तो भारत की छवि को गहरा नुकसान पहुंचता है.

क्या महिलाएं भारत में सुरक्षित महसूस करेंगी?

इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या महिला सैलानी अगली बार भारत आने की हिम्मत करेंगी? ब्रिता ने खुद कहा कि वो शायद दोबारा होली मनाना चाहेंगी, लेकिन बिल्कुल अलग तरीके से. वो अब सुरक्षा को लेकर ज्यादा सतर्क रहेंगी.

त्योहार की साख बचाना क्यों जरूरी है?

होली रंगों, भाईचारे और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. लेकिन अगर इसमें पत्थर, जबरदस्ती और डर शामिल हो जाए, तो इसकी पवित्रता खत्म हो जाती है. वृंदावन जैसे धार्मिक स्थल पर ऐसी घटनाएं होना और भी ज्यादा चिंताजनक है.

हजारों लोग दूर-देश से हमारी संस्कृति को करीब से देखने आते हैं. अगर हम उन्हें सुरक्षा का अहसास नहीं करा सकते, तो हम 'अतिथि देवो भव' की बात कैसे कर सकते हैं? प्रशासन और समाज, दोनों को मिलकर यह तय करना होगा कि त्योहारों के नाम पर होने वाली इस गुंडागर्दी को कैसे रोका जाए.

आने वाले सैलानियों के लिए कुछ सबक

ब्रिता की कहानी उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है जो पहली बार भारत में होली देखने आ रहे हैं. जानकारों का कहना है कि भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने के बजाय, किसी सुरक्षित ग्रुप या होटल द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होना ज्यादा बेहतर है. साथ ही, आंखों के बचाव के लिए चश्मा पहनना और अनजान लोगों से दूरी बनाए रखना बहुत जरूरी है.

ये भी पढ़ें- Holi 2026: 'ये जवानी है दीवानी' से 'बद्रीनाथ की दुल्हनिया' तक, बॉलीवुड की इन फिल्मों में चला होली का जादू

holi Viral News
Advertisment