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वायरल वीडियो Photograph: (X)
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में ट्रेन का टिकट चेकर यानी TTE एक यात्री से बहस करते और कथित तौर पर बदतमीजी करते हुए नजर आ रहा है. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि TTE यात्री का कॉलर पकड़कर उससे टिकट दिखाने की मांग कर रहा है. TTE का दावा है कि यात्री बिना टिकट AC बोगी में यात्रा कर रहा था.
वीडियो के सामने आने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं बंटी हुई नजर आ रही हैं. कुछ लोगों का कहना है कि बिना टिकट यात्रा करना गलत है और इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, जबकि कई यूजर्स ने TTE के व्यवहार को पूरी तरह अनुचित बताया है.
क्या यात्री के पास नहीं होता है टिकट?
वीडियो में बार-बार TTE यात्री से टिकट दिखाने को कहता है, लेकिन यात्री के पास टिकट नहीं होता. अब सोशल मीडिया पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या किसी सरकारी कर्मचारी को इस तरह शारीरिक या अपमानजनक व्यवहार करने का अधिकार है. लोगों का कहना है कि नियमों का पालन कराना जरूरी है, लेकिन मर्यादा में रहकर.
कुछ यूजर्स ने यह भी लिखा कि यदि यात्री दोषी है तो जुर्माना लगाया जाए, लेकिन कानून अपने हाथ में लेना गलत है. यह मामला केवल अनुशासन का नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और कर्मचारियों की ट्रेनिंग से भी जुड़ा हुआ है.
AC बोगी में बिना टिकट यात्रा कैसे संभव?
इस पूरे मामले में एक अहम सवाल यह भी उठ रहा है कि AC बोगी जैसी सुरक्षित और आरक्षित श्रेणी में कोई बिना टिकट यात्री कैसे पहुंच गया. यात्रियों का कहना है कि यदि नियमित जांच होती तो ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होती. इससे रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
क्या कहता है रेलवे कानून?
भारतीय रेलवे अधिनियम 1989 के अनुसार, बिना टिकट यात्रा करना कानूनन अपराध है. TTE को अधिकार है कि वह किसी भी यात्री से टिकट की जांच करे और नियमों के अनुसार कार्रवाई करे. अगर यात्री जुर्माना भरने से इनकार करता है या दुर्व्यवहार करता है, तो TTE रेलवे सुरक्षा बल या GRP को बुला सकता है.
बिना टिकट यात्रा पर कितना जुर्माना?
रेलवे नियमों के मुताबिक, बिना टिकट यात्रा करने पर न्यूनतम ₹250 का जुर्माना लगाया जाता है. इसके साथ ही यात्री को उस रूट का सामान्य किराया भी देना होता है. यात्रा की दूरी और क्लास के आधार पर यह जुर्माना और बढ़ सकता है. जुर्माना वसूलते समय TTE द्वारा यात्री को रसीद देना अनिवार्य होता है. यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि कानून का पालन जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उसे लागू करने का तरीका भी.
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