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Magh Mela 2026
Magh Mela 2026: प्रयागराज के महाकुंभ मेले के बाद अब माघ मेले की शुरुआत 03 जनवरी 2026 से शुरु हो चुकी है. मेले की भव्य शुरुआत के साथ ही यह धार्मिक आयोजन अब सिर्फ आस्था तक सीमित नहीं रहा बल्कि सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट का बड़ा केंद्र भी बन गया है. आपने महाकुंभ में कई अघोरी बाबा का वीडियो देखा होगा जो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे थे. इस बार भी देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच हड्डी चबाते साधु से 36 साल से न नहाने वाले बाबा तक कुछ ऐसे साधु-संत देखने को मिले हैं जिनकी साधना और जीवनशैली ने लोगों को हैरान कर दिया है. इनके वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं और लाखों लोग इन्हें देख भी रहे हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में
हड्डी चबाने वाले साधु बाबा
प्रयागराज के माघ मेले से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों खूब सुर्खियां बटोर रहा है, जिसमें एक अघोरी साधु हड्डी चबाते हुए दिखाई दे रहे हैं. वीडियो सामने आने के बाद लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. जब साधु से इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उनकी साधना का यह भी एक हिस्सा है. उन्होंने बताया कि वे भी अन्य साधु-संतों की तरह ध्यान और भजन करते हैं और रोजाना रात के समय ईश्वर की भक्ति में लीन रहते हैं.
3 फुट 8 इंच वाले बाबा
माघ मेले में आएं गंगापुरी महाराज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं. उनकी लंबाई मात्र 3 फुट 8 इंच है जिसके कारण सोशल मीडिया पर उन्हें दुनिया का सबसे छोटा बाबा कहा जा रहा है. गंगापुरी बाबा अपनी उम्र 58 साल बताते हैं. वे अर्धनारीश्वर के उपासक हैं और अपने एक हाथ में चूड़ी-कंगन पहनते हैं. बाबा का दावा है कि वे पिछले 36 सालों से कभी नहीं नहाए हैं. उनके अनुसार यह उनकी विशेष साधना का हिस्सा है. नहाने की बजाय वे अपने शरीर पर भस्म यानी राख लगाते हैं.
7 साल से एक पैर पर खड़े होकर कर रहे हैं तपस्या
प्रयागराज के माघ मेले में आए अनोखे बाबा जो बीते 7 सालों से एक पैर पर खड़े हैं. 26 साल के नागा बाबा शंकरपुरी भी चर्चा का विषय बने हुए हैं. यूपी के सीतापुर जिले के नैमिषारण्य से आए बाबा पिछले 7 सालों से एक पैर पर खड़े होकर तपस्या कर रहे हैं. प्रयागराज के अक्षय वट मार्ग के किनारे उन्होंने अपनी कुटिया बनाई है जहां झूले के सहारे वे एक पैर पर संतुलन बनाए रखते हैं.
दर्शन के लिए उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
इन सभी अनोखे साधु-संतों की साधना और जीवनशैली को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. कोई इसे आस्था से जोड़ रहा है तो कोई इसे चमत्कार मान रहा है. माघ मेला 2026 में इस तरह के दृश्य लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे यह आयोजन धार्मिक के साथ-साथ डिजिटल चर्चा का भी बड़ा मंच बन गया है.
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