'हिजाब मत पहनो...तब मिलेगा फ्लैट', कश्मीर से आई मुस्लिम छात्रा ने दिल्ली में किराए पर भेदभाव का लगाया आरोप, Video हुआ वायरल

Viral Video: दिल्ली में किराए पर घर लेने को लेकर कश्मीरी मुस्लिम युवती ने धर्म और हिजाब के आधार पर भेदभाव का आरोप लगाया है. सोशल मीडिया पर इसका वीडियो जमकर वायरल हो रहा है. चलिए जानते हैं क्या है पूरा मामला?

Viral Video: दिल्ली में किराए पर घर लेने को लेकर कश्मीरी मुस्लिम युवती ने धर्म और हिजाब के आधार पर भेदभाव का आरोप लगाया है. सोशल मीडिया पर इसका वीडियो जमकर वायरल हो रहा है. चलिए जानते हैं क्या है पूरा मामला?

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Akansha Thakur
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Kashmiri Girl Viral Video

वायरल वीडियो Photograph: (x)

Kashmiri Girl Viral Video: देश की राजधानी दिल्ली में किराए का मकान मिलना हर किसी के लिए आसान नहीं होता. लेकिन कश्मीरी मुस्लिम महिला मुनज्जा के लिए यह अनुभव और भी तकलीफदेह रहा. मुनज्जा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए आरोप लगाया है कि फ्लैट तलाशते समय उन्हें बार-बार भेदभाव का सामना करना पड़ा. उनका कहना है कि कई जगहों पर सिर्फ धर्म की वजह से उन्हें घर देने से मना कर दिया गया. अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है जिसपर यूजर्स अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. 

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कश्मीरी मुस्लिम छात्रा ने बयां किया दर्द 

कश्मीरी छात्रा ने वीडियो में अपना दर्द बयान करते हुए कहा कि जब मैं मकान देखने गईं, तो कई मकान मालिकों और ब्रोकरों ने पहले उनका धर्म जानना चाहा. जैसे ही उन्हें पता चला कि वह मुस्लिम हैं,कई जगह बातचीत अचानक खत्म कर दी गई.  कुछ लोगों ने साफ शब्दों में फ्लैट देने से इनकार कर दिया.

'हिजाब मत पहनो तब मिलेगा फ्लैट' 

इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात तब सामने आई, जब एक जगह उनसे कहा गया कि फ्लैट तभी मिलेगा जब वह हिजाब पहनना छोड़ देंगी. मुनज्जा ने इसे धार्मिक आजादी और निजी अधिकारों के खिलाफ बताया. उनका कहना है कि यह शर्त मानसिक रूप से बहुत परेशान करने वाली थी.

यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं 

मुनज्जा ने अपने अनुभव को एक वीडियो के जरिए सोशल मीडिया पर साझा किया है. वीडियो वायरल होने के बाद इस पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. एक यूजर ने कमेंट किया कि “अगर परेशानी है तो लोग मुस्लिम इलाकों में घर क्यों नहीं देखते?” वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा कि उनके दोस्त को भी नौकरी के सिलसिले में दिल्ली आने पर 6–7 महीने तक फ्लैट नहीं मिला.  आखिरकार उन्हें मुस्लिम इलाके में ही घर लेना पड़ा. यूजर ने कहा कि यह समस्या सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है. 

मुनज़्ज़ा ने इस बातचीत को भावनात्मक रूप से परेशान करने वाला और भेदभावपूर्ण बताया, और कहा कि इनकार पहचान के आधार पर किया गया था, न कि योग्यता के आधार पर.  यह जानकारी मुनज़्ज़ा के सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है. अब तक किसी पुलिस शिकायत या कोर्ट केस की सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है. 

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