समुद्र के नीचे भगवान शिव की विशाल प्रतिमा, वायरल वीडियो की क्या है सच्चाई?

Viral News: सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक समुद्र के नीचे तैर रहा होता है, तभी उसे भगवान शिव की एक बड़ी मूर्ति नजर आती है. ये देख हर कोई हैरान हो जाता है.

Viral News: सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक समुद्र के नीचे तैर रहा होता है, तभी उसे भगवान शिव की एक बड़ी मूर्ति नजर आती है. ये देख हर कोई हैरान हो जाता है.

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Ravi Prashant
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Lord Shiva Stute Under Sea Water

वायरल अंडरवाटर शिव मूर्ति वीडियो Photograph: (instagram)

Viral News: सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें समुद्र के अंदर भगवान शिव की एक विशाल प्रतिमा नजर आ रही है. वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रतिमा के पास एक युवक तैरता हुआ दिख रहा है, जिससे यह दृश्य और भी रहस्यमयी लगता है. पहली नजर में यह वीडियो असली लगता है, लेकिन असल में यह एक एआई-जेनरेटेड वीडियो है, जो लोगों को चौंका रहा है.

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क्या है वीडियो में?

वायरल वीडियो में समुद्र के नीचे भगवान शिव का एक विशाल सिर नजर आता है, जो समय के साथ पानी में डूबी किसी प्राचीन मूर्ति जैसा प्रतीत होता है. वीडियो को इस तरह से बनाया गया है कि यह एक वास्तविक अंडरवाटर साइट जैसा लगे. इसके पास एक युवक तैरते हुए दिखाई देता है, जिससे यह दृश्य और भी विश्वसनीय लगता है. वीडियो को देखकर कई लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे इतिहास से जोड़कर देख रहे हैं.

देख यूजर्स क्या बोले? 

यह वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. कुछ यूजर्स इसे भगवान शिव का कोई प्राचीन मंदिर बता रहे हैं, जो हजारों सालों से समुद्र में डूबा हुआ था और अब सामने आया है. वहीं, कुछ लोग इसे डिजिटल एडिटिंग और एआई तकनीक का कमाल मान रहे हैं. कई यूजर्स इस वीडियो को देखकर भावुक हो गए और इसे आस्था से जोड़कर शेयर कर रहे हैं.

सच्चाई क्या है?

फैक्ट-चेकिंग के बाद पता चला है कि यह वीडियो पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक से बनाया गया है. आजकल एआई के जरिए ऐसे हाइपर-रियलिस्टिक वीडियो बनाए जा सकते हैं, जो असली जैसे लगते हैं. कई डिजिटल कलाकार इस तरह के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं, जिससे लोग भ्रमित हो जाते हैं.

सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो पूरी तरह से एआई-जनित है और इसका किसी भी ऐतिहासिक या धार्मिक तथ्य से कोई संबंध नहीं है. हालांकि, इस वीडियो ने यह जरूर साबित कर दिया कि आजकल एआई और डिजिटल एडिटिंग की तकनीक इतनी उन्नत हो गई है कि वह लोगों को वास्तविकता और कल्पना के बीच भ्रमित कर सकती है. इसलिए, किसी भी वायरल वीडियो को सच मानने से पहले उसकी प्रमाणिकता जांचना जरूरी है.

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