इंसानों के नए 'बेस्ट फ्रेंड' बने घोड़े, कुत्तों की तरह डर को सूंघकर करते हैं अलर्ट

आपने अक्सर कुत्तों के बारे में सुना होगा कि वे इंसानों के सबसे वफादार या अच्छे दोस्त होते हैं, जो किसी आपदा के समय उन्हें अलर्ट कर देते हैं. लेकिन फ्रांस में हुए एक शोध में पता चला है कि कुत्तों की तरह घोड़े भी इंसानों के डर को पहचान लेते हैं.

आपने अक्सर कुत्तों के बारे में सुना होगा कि वे इंसानों के सबसे वफादार या अच्छे दोस्त होते हैं, जो किसी आपदा के समय उन्हें अलर्ट कर देते हैं. लेकिन फ्रांस में हुए एक शोध में पता चला है कि कुत्तों की तरह घोड़े भी इंसानों के डर को पहचान लेते हैं.

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Suhel Khan
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Horses have become humans new best friends

इंसानों के नए दोस्त बने घोड़े Photograph: (Social Media)

कुत्तों को इंसानों का सबसे करीबी और वफादार जानवर माना जाता है, जो आने वाली परेशानी को पहचान कर उन्हें अलर्ट कर देता है. कई बाद वह अपने मालिक को बचाने के लिए अपनी जान पर खेल जाता है. लेकिन ऐसे करने वाले सिर्फ कुत्ते ही नहीं हैं. बल्कि इस कड़ी में अब घोड़ा का नाम भी शामिल हो गया है. दरअसल, एक शोध में इस बात का पता चला है कि घोड़ों में भी यही क्षमता होती है जो कुत्तों के अंदर पाई जाती है. घोड़े मुख्य रूप से इंसानों के डर को सूंघ सकते हैं.

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फ्रांस में हुआ घोड़ों पर शोध

ये शोध फ्रांस की टूर्स यूनिवर्सिटी में हुआ है. शोध में शामिल एक्सपर्ट्स ने पाया कि जब घोड़ों को डर का अनुभव कर रहे मनुष्यों की गंध के नमूनों के संपर्क में लाया गया, तो वे अधिक प्रतिक्रियाशील नजर आए. यही नहीं सकारात्मक भावनाओं से जुड़ी गंधों से उत्पन्न प्रतिक्रियाओं की तुलना में घोड़ों की हृदय गति पहले से अधिक बढ़ गई. ऐसे में वे अपने संचालकों के पास आने में अधिक हिचकिचाते दिखे.

इंसानी शरीर की गंध से चल जाता है पता

शोध में शामिल घोड़ों ने कुत्तों की तरह भावनात्मक अवस्थाओं के दौरान मानव पसीने में उत्सर्जित रासायनिक संकेतों का पता लगाया. ये रासायनिक संकेत वाष्पशील यौगिकों से बने होते हैं जो किसी व्यक्ति के तनावग्रस्त या चिंतित होने पर बदल जाते हैं. शोधार्थियों का कहना है कि, कुत्तों ने पालतू बनने के दौरान यह क्षमता विकसित की. जबकि घोड़ों की यह क्षमता उनके अस्तित्व से जुड़ी है, क्योंकि ये जानवर अपने वातावरण में खतरे के संकेतों को पहचानने के लिए पहले से ही तैयार होते हैं.

'एक दूसरे से जुड़े होते हैं इंसान और जानवर'

फ्रांस के टूर्स विश्वविद्यालय की डॉ. लीया लैंसडे ने कहा कि, 'यह शोध बताता है कि जानवर और मनुष्य कितने घनिष्ठ रूप से एक दूसरे से जुड़े हुए हैं.' उन्होंने कहा कि, 'अनजाने में, हम अपनी भावनाओं को जानवरों तक पहुंचा सकते हैं, जिसके बदले में उनकी अपनी भावनाओं पर काफी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है.' उन्होंने आगे कहा कि, जब मनुष्य भय या डर महसूस करते हैं, तो शरीर एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन छोड़ता है, जिससे पसीने की रासायनिक संरचना बदल जाती है. इन परिवर्तनों के कारण त्वचा वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों के रूप में जाने जाने वाले गंध अणुओं का एक अलग मिश्रण छोड़ती है. डर के समय पसीने में अक्सर एल्डिहाइड, कीटोन, फैटी एसिड और एंड्रोस्टाडिएन जैसे स्टेरॉयड-संबंधित रसायनों का स्तर बढ़ जाता है.

इंसान को नहीं चलता इस गंध का पता

हालांकि इंसानों को इन रसायनों की गंध न के बराबर या बहुत कम महसूस होती है. लेकिन अत्यधिक संवेदनशील नाक वाले जानवर इन्हें पहचान सकते हैं. ये रासायनिक परिवर्तन मिलकर एक विशिष्ट गंध का निर्माण करते हैं जो तनाव या खतरे का संकेत देती है. नए अध्ययन में यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि क्या घोड़े मानव पसीने में मौजूद इन यौगिकों को पहचान सकते हैं. शोधकर्ताओं ने मनुष्यों की बगलों में रुई के पैड रखे, जब वे डरावने या सुखद वीडियो देख रहे थे, या फिर उन्हीं पैडों को 43 मादा घोड़ों के नथुनों के पास रखा. इसकी तुलना के लिए कुछ घोड़ों को साफ, अप्रयुक्त पैड भी दिए गए.

शोध के दौरान घोड़ों को सुंघाया गया इंसानों का पसीना

मानव गंध वाले सूती पैड घोड़ों की नाक के पास रखे गए, जबकि जानवरों पर अचानक होने वाली घटनाओं, अपरिचित वस्तुओं से जुड़े नवीनता परीक्षण और मानव संपर्क परीक्षण किए गए. वैज्ञानिकों ने उनके व्यवहार और हृदय गति को मापा. परिणामों से पता चला कि भयभीत मनुष्यों से निकलने वाली गंध के संपर्क में आने वाले घोड़े अधिक तीव्र प्रतिक्रिया देते हैं और वे आसानी से चौंक जाते हैं, उनकी हृदय गति बढ़ जाती है, वे अपरिचित वस्तुओं को अधिक देर तक घूरते हैं और किसी व्यक्ति के पास जाने या उसे छूने की संभावना कम रखते हैं.

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