अकेली बच्ची और आवारा कुत्तों का पूरा झुंड! देखिए कैसे 'नन्हीं परी' ने अपनी जान दांव पर लगाकर बचाई उल्लू की जान

जमशेदपुर की 13 वर्षीय छात्रा शान्वी किरण महतो ने आवारा कुत्तों के हमले से एक उल्लू की जान बचाकर मिसाल पेश की है. बच्ची की सूझबूझ, संवेदनशीलता और कानूनी जागरूकता की सोशल मीडिया पर जमकर सराहना हो रही है.

जमशेदपुर की 13 वर्षीय छात्रा शान्वी किरण महतो ने आवारा कुत्तों के हमले से एक उल्लू की जान बचाकर मिसाल पेश की है. बच्ची की सूझबूझ, संवेदनशीलता और कानूनी जागरूकता की सोशल मीडिया पर जमकर सराहना हो रही है.

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Ravi Prashant
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वायरल वीडियो Photograph: (X)

सोशल मीडिया के दौर में जहां अक्सर लोग किसी घटना को कैमरे में कैद करने तक सीमित रह जाते हैं, वहीं जमशेदपुर की 13 वर्षीय छात्रा शान्वी किरण महतो ने साहस और संवेदनशीलता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने सभी का ध्यान खींचा है. विद्या भारती चिन्मया विद्यालय की सातवीं कक्षा की छात्रा शान्वी आज वन्यजीव प्रेमियों के बीच एक नन्ही हीरो के रूप में पहचानी जा रही हैं.

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कुत्तों के झुंड में फंसा उल्लू

रविवार की सुबह टेल्को कॉलोनी क्षेत्र में भुवनेश्वरी मंदिर के पास अचानक आवारा कुत्तों के भौंकने की तेज आवाज सुनाई दी. खेल रही शान्वी की नजर जब उस ओर पड़ी, तो उसने देखा कि कुत्तों का एक झुंड एक छोटे उल्लू को घेर कर उस पर हमला करने की कोशिश कर रहा है. उल्लू डर के मारे उड़ने में असमर्थ था और पूरी तरह असहाय स्थिति में था.

बिना डरे दिखाई बहादुरी

अपनी उम्र और सुरक्षा की परवाह किए बिना शान्वी ने तुरंत हिम्मत दिखाई. उसने कुत्तों को वहां से खदेड़ा और उल्लू को सुरक्षित अपने पास ले आई. आसपास मौजूद लोग जहां सिर्फ तमाशबीन बने रहे, वहीं एक बच्ची ने वह कर दिखाया, जो बड़े-बड़े लोग भी करने से हिचकते हैं.

देखभाल से बची जान

शान्वी यहीं नहीं रुकी. वह उल्लू को अपने घर ले गई और उसे शांत करने की कोशिश की. उसने पक्षी को मांस खिलाया और ड्रॉपर की मदद से पानी पिलाया, ताकि उसकी हालत में सुधार हो सके. सोशल मीडिया पर जब इस रेस्क्यू की जानकारी सामने आई, तो लोग शान्वी की समझदारी और करुणा की जमकर तारीफ करने लगे.

कानूनी समझ ने सबको चौंकाया

इस पूरे मामले में सबसे खास बात शान्वी की जागरूकता रही. उसे यह जानकारी थी कि उल्लू एक संरक्षित वन्यजीव है और इसकी सूचना वन विभाग को देना जरूरी है. उसने स्वयं पूर्वी सिंहभूम के डीएफओ को फोन कर घटना की जानकारी दी. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची.वन अधिकारी उत्तम महतो के अनुसार, उल्लू वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-एक में शामिल है, जिसे सर्वोच्च स्तर का संरक्षण प्राप्त है. शान्वी ने एक संरक्षित प्रजाति की जान बचाकर सराहनीय कार्य किया है.

अब उल्लू सुरक्षित हाथों में

वन विभाग ने उल्लू को अपने संरक्षण में लेकर बेहतर इलाज और देखभाल के लिए टाटा जू भेज दिया है. अधिकारियों का कहना है कि पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उल्लू को उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा.

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