Jharkhand: पेसा कानून को लेकर बाबूलाल मरांडी का हमला, हेमंत सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

Jharkhand: पेसा कानून को लेकर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि नई नियमावली में आदिवासी धार्मिक और सामाजिक परंपराओं को कमजोर किया गया है.

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Deepak Kumar
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Jharkhand: पेसा कानून को लेकर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि नई नियमावली में आदिवासी धार्मिक और सामाजिक परंपराओं को कमजोर किया गया है.

Jharkhand:झारखंड बीजेपी अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने पंचायत उपबंध अधिनियम 1996 यानी पेसा कानून को लेकर हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि पेसा कानून का मूल उद्देश्य आदिवासी समाज की सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक परंपराओं की रक्षा करना था, लेकिन राज्य सरकार ने नियमावली बनाते समय इसके असली भाव को कमजोर कर दिया है.

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मरांडी ने पेसा कानून पर क्या बोला?

बीबूलाल मरांडी ने बताया कि पेसा कानून 1996 में बना था, जब देश में कांग्रेस की सरकार थी. यह कानून देशभर की 700 से अधिक अनुसूचित जनजातियों को मजबूत करने के लिए लाया गया था. झारखंड में भी करीब 35 जनजातियां हैं, जिनकी अपनी अलग धार्मिक मान्यताएं, सामाजिक परंपराएं और रीति-रिवाज हैं. उन्होंने कहा कि पेसा कानून की धारा 4 (क) में साफ लिखा है कि ग्राम सभा से जुड़े फैसले आदिवासी समाज की पारंपरिक सामाजिक और धार्मिक प्रथाओं के अनुसार होंगे. इसका मतलब है कि ग्राम सभा का अध्यक्ष वही बन सकता है, जो अपनी जनजातीय आस्था और पूजा-पद्धति को मानता और उसका पालन करता हो.

मरांडी ने हेमंत सरकार पर साधा निशाना

मरांडी ने उदाहरण देते हुए कहा कि संथाल समाज की अपनी अलग आस्था है. वे मारांग बुरु, जाहेर आयो, मांझी थान और जाहेर थान की पूजा करते हैं. अगर कोई व्यक्ति इन परंपराओं को छोड़ देता है, तो वह ग्राम सभा का अध्यक्ष बनने के योग्य नहीं होना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार ने नई नियमावली में “सामाजिक और धार्मिक प्रथाओं” की जगह केवल “रीति-रिवाज” शब्द का इस्तेमाल किया है, जिससे धार्मिक आस्था और पारंपरिक विश्वासों को नजरअंदाज किया गया है. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यही वजह है कि पेसा कानून को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है. प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए उन्होंने सरकार से नियमावली में सुधार की मांग की और कहा कि आदिवासी परंपराओं से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा.

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