Jharkhand News: पेशा कानून की नियमावली को लेकर कांग्रेस में मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं. प्रदेश प्रभारी की बैठक में पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव ने पार्टी रुख से अलग आदिवासी समाज के समर्थन में खड़े होने का ऐलान किया.
Jharkhand News: झारखंड राज्य मेंपेशा नियमावली को लेकर कांग्रेस में साफ तौर पर दो राय नजर आ रही हैं. एक ओर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने इस मुद्दे पर पार्टी की बड़ी बैठक बुलाई, वहीं दूसरी ओर पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता डॉ. रामेश्वर उरांव ने खुलकर पार्टी के रुख से असहमति जताई. बैठक के दौरान डॉ. रामेश्वर उरांव ने साफ कहा कि पेशा कानून की जो नियमावली सरकार ने लागू की है, उसमें गलतियां हैं. उन्होंने कहा कि वह किसी पार्टी बंधन में नहीं हैं और इस मामले में आदिवासी समाज के साथ खड़े रहेंगे. यहां तक कि अगर आदिवासी समाज कोर्ट जाता है, तो वह भी उनके साथ जाएंगे.
कांग्रेस में मतभेद
कांग्रेस का कहना है कि पेशा कानून आदिवासी परंपराओं के अनुसार लागू किया गया है, लेकिन रामेश्वर उरांव का मानना है कि जो मसौदा तैयार हुआ था और जो नियम लागू किए गए हैं, उनमें बड़ा अंतर है. इसी कारण वह इस नियमावली से सहमत नहीं हैं.
क्या है असल विवाद?
असल विवाद ग्राम सभा की परिभाषा को लेकर है. नए नियमों में “अन्य” शब्द जोड़ा गया है, जिससे गैर-परंपरागत लोगों को भी ग्राम सभा में शामिल करने का रास्ता खुलता है. आदिवासी समाज को आशंका है कि इससे उनकी पारंपरिक व्यवस्था कमजोर होगी. रामेश्वर उरांव, जो स्वयं आदिवासी समाज से आते हैं, ने कहा कि जब आदिवासी हित और परंपरा की बात होगी, तो वह समाज के साथ ही खड़े रहेंगे. इस बयान से कांग्रेस के भीतर मतभेद और गहराते दिख रहे हैं.
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