डिलीवरी बॉय नहीं गुरुग्राम में अब ड्रोन और एआई रोबोट पहुंचाएंगे सामान, इस भारतीय कंपनी ने शुरू की सेवा

गुरुग्राम के सेक्टर 102 में देश का पहला पूरी तरह ऑटोमैटिक एआई डिलीवरी नेटवर्क शुरू हुआ है. अब ड्रोन और रोबोट मिलकर खाना, किराना और छोटा सामान सीधे लोगों के दरवाजे तक पहुंचाएंगे.

गुरुग्राम के सेक्टर 102 में देश का पहला पूरी तरह ऑटोमैटिक एआई डिलीवरी नेटवर्क शुरू हुआ है. अब ड्रोन और रोबोट मिलकर खाना, किराना और छोटा सामान सीधे लोगों के दरवाजे तक पहुंचाएंगे.

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Deepak Kumar
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गुरुग्राम में अब डिलीवरी की तस्वीर तेजी से बदल रही है. यहां के सेक्टर 102 में देश का पहला पूरी तरह ऑटोमैटिक ‘फिजिकल एआई’ डिलीवरी नेटवर्क शुरू हो गया है. इस नई तकनीक की शुरुआत गुरुग्राम स्थित कंपनी Sky Air Mobility ने की है. अब यहां कुछ इलाकों में सामान पहुंचाने के लिए डिलीवरी बॉय की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि ड्रोन और एआई से चलने वाले रोबोट मिलकर यह काम करेंगे.

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ड्रोन द्वारा की जा चुकी है लाखों डिलीवरी

कंपनी के अनुसार, अब तक 3.6 मिलियन यानी 36 लाख से ज्यादा ड्रोन डिलीवरी की जा चुकी हैं. पिछले 30 महीनों में इस तकनीक से करीब हजार टन कार्बन उत्सर्जन कम हुआ है. इससे ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों में कमी आने की उम्मीद है. आपको बता दें कि इस पहल की घोषणा हाल ही में आयोजित AI Impact Summit 2026 में की गई थी. इस समिट में 88 देशों ने हिस्सा लिया और एआई को आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण से जोड़ने पर सहमति बनी.

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

इस पूरी प्रक्रिया में चार मुख्य हिस्से काम करते हैं-

  • पहला है ‘स्काई पोर्ट’, जहां से ड्रोन उड़ान भरते हैं.

  • दूसरा है ‘स्काई शिप’, यानी ड्रोन जो सामान को तय स्थान तक पहुंचाता है.

  • तीसरा हिस्सा है ‘अराइव पॉइंट’, जो एक स्मार्ट और सुरक्षित बॉक्स है. ड्रोन यहां पैकेट ड्रॉप करता है.

  • चौथा हिस्सा है ‘ऑटोबॉट्स’, यानी छोटे एआई रोबोट. ये रोबोट उस स्मार्ट बॉक्स से सामान निकालकर सीधे ग्राहक के दरवाजे तक पहुंचाते हैं.

ग्राहक को डिलीवरी लेते समय मोबाइल पर आए ओटीपी से वेरिफिकेशन करना होगा. ओटीपी डालते ही रोबोट का सुरक्षित कंपार्टमेंट खुल जाएगा.

पीएम मोदी ने की थी सराहना

समिट के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस स्वदेशी नवाचार की सराहना की. उन्होंने कहा कि भारत अब सिर्फ सॉफ्टवेयर ही नहीं, बल्कि असली दुनिया में एआई के उपयोग में भी आगे बढ़ रहा है.

लॉजिस्टिक्स लागत होगी कम

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मॉडल से लॉजिस्टिक्स लागत 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो सकती है. साथ ही, भविष्य में ड्रोन कॉरिडोर और एआई आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम भी विकसित हो सकते हैं. अगर गुरुग्राम का यह मॉडल सफल रहा, तो जल्द ही देश के दूसरे शहरों में भी ड्रोन और रोबोट के जरिए डिलीवरी शुरू हो सकती है.

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