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Gold Silver Price Today: सोने की कीमतों में बीते दिनों बड़े उछाल ने हर किसी को बेहाल कर रखा है. सोना खरीदने का मन बना रहे लोगों को लगातार झटके लग रहे हैं. लेकिन इन सबके बीच अब एक अच्छी खबर सामने आई है. पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और कमोडिटी बाजार को झकझोर कर रख दिया है. पिछले छह दिनों से चल रहे संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर गंभीर असर पड़ा है. ऐसे में गोल्ड और सिल्वर के रेट भी धड़ाम हो गए हैं. अब चाहें तो अपनी तिजोरी पीली धातु से भर सकते हैं.
क्यों गिरी सोने और चांदी की कीमतें?
ईरान की ओर से रणनीतिक समुद्री मार्ग Strait of Hormuz को बंद करने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है. यह वही समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के कुल तेल और ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है. इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है. दूसरी ओर, पारंपरिक सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना और चांदी की कीमतों में अचानक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों के बीच नई रणनीतियों पर चर्चा शुरू हो गई है.
तेल की कीमतों में तेज उछाल
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और आपूर्ति मार्गों में बाधा के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत तेजी से बढ़ी है. वैश्विक बाजार में तेल का भाव बढ़कर करीब 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचता है या समुद्री मार्ग लंबे समय तक बाधित रहते हैं तो कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है.
ऊर्जा आपूर्ति पर इसका असर खास तौर पर यूरोप और एशिया के कई देशों पर पड़ रहा है, जो खाड़ी क्षेत्र से बड़ी मात्रा में तेल और गैस आयात करते हैं. आपूर्ति में अनिश्चितता के कारण ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है.
सोना-चांदी के दाम में गिरावट
जहां तेल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं सोना और चांदी के बाजार में गिरावट देखने को मिली है. भारत के कमोडिटी एक्सचेंज मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने और चांदी के वायदा भाव में कमजोरी दर्ज की गई.
अप्रैल वायदा के लिए सोना करीब 1000 रुपये गिरकर लगभग 1.60 लाख रुपये के स्तर तक आ गया. इसी तरह मार्च वायदा में चांदी की कीमत में भी बड़ी गिरावट आई और एक किलोग्राम चांदी का भाव लगभग 7,500 रुपये टूटकर करीब 2.58 लाख रुपये तक पहुंच गया. हालांकि बाद में बाजार में हल्की रिकवरी भी देखने को मिली.
निवेशकों की मुनाफावसूली का असर
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध शुरू होने से पहले ही सोने और चांदी की कीमतों में काफी तेजी आ चुकी थी. संघर्ष के शुरुआती दिनों में भी निवेशकों ने इन धातुओं में सुरक्षित निवेश के तौर पर खरीदारी की थी.
लेकिन अब कई निवेशक मुनाफावसूली कर रहे हैं और नकदी को सुरक्षित रखने की रणनीति अपना रहे हैं. इसी कारण सोने और चांदी की कीमतों में अस्थायी गिरावट देखी जा रही है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी उतार-चढ़ाव
वैश्विक बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का स्पॉट प्राइस 85 डॉलर से घटकर करीब 83 डॉलर तक आ गया है. 3 मार्च को आई तेज उछाल के बाद इसमें करीब 15 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई थी, हालांकि अब इसमें धीरे-धीरे सुधार हो रहा है.
इसी तरह सोने की कीमत भी अपने उच्च स्तर से नीचे आ गई है और करीब 5200 डॉलर के आसपास कारोबार कर रही है.
1,22,160 में एक तोला सोना
अगर आप सोना खरीदना चाहते हैं तो आप महज 1,22,160 रुपए में 10 ग्राम सोना खरीद सकते हैं. मौजूदा कीमतें 18 कैरेट गोल्ड की हैं. वहीं 22 कैरेट खरीदना चाहते हैं तो आपको 1,49,300 कीमत चुकाना होगी.
रिकॉर्ड हाई से अब भी काफी सस्ते
अगर पिछले रिकॉर्ड स्तर से तुलना करें तो दोनों कीमती धातुएं अभी भी काफी सस्ती हैं. कमोडिटी बाजार में सोने का रिकॉर्ड हाई लगभग 1.93 लाख रुपये और चांदी का रिकॉर्ड करीब 4.20 लाख रुपये रहा है.
इस हिसाब से सोना अपने उच्चतम स्तर से करीब 33 हजार रुपये सस्ता है, जबकि चांदी लगभग 1.62 लाख रुपये नीचे कारोबार कर रही है.
ETF बाजार में भी गिरावट
सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का असर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड पर भी पड़ा है. गोल्ड ईटीएफ में एक दिन में करीब 4 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई, जबकि सिल्वर ईटीएफ में 8 प्रतिशत तक की कमजोरी देखी गई.
अगले दिन भी गिरावट जारी रही और गोल्ड ईटीएफ करीब 2 प्रतिशत और सिल्वर ईटीएफ करीब 4 प्रतिशत तक नीचे रहे.
आगे क्या रहेगा रुख?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव बना रहेगा, तब तक कमोडिटी बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है. तेल की कीमतों में तेजी जारी रह सकती है, जबकि सोना और चांदी निवेशकों की रणनीति और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार ऊपर-नीचे होते रहेंगे.
अगर संघर्ष लंबा चलता है तो इसका असर केवल कमोडिटी बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है.
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