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MP: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के गैरतगंज क्षेत्र की टेकापार कॉलोनी में सोमवार (5 जनवरी) एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. दरअसल, यहां खड़ी एक मारुति वैन में रखा गैस सिलेंडर अचानक जोरदार धमाके के साथ फट गया. धमाका इतना तेज था कि पूरी वैन आग के गोले में बदल गई और उसके परखच्चे उड़ गए. विस्फोट की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई. गनीमत रही कि घटना के समय वाहन के आसपास कोई और मौजूद नहीं था, वरना बड़ा जान-माल का नुकसान हो सकता था. तो चलिए आपको बताते हैं कि वाहनों में सिलेंडर रखना कितना खतरनाक है. साथ ही यहां जानें क्या कहते हैं कानूनी नियम और घरेलू-कमर्शियल सिलेंडर में क्या है फर्क.
वाहनों में गैस सिलेंडर रखना कितना खतरनाक?
घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर हमारी रोजमर्रा की जरूरत हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल और परिवहन बेहद सावधानी से करना जरूरी है. थोड़ी-सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है. अक्सर लोग सुविधा के लिए गैस सिलेंडर बाइक, कार या वैन में रखकर ले जाते हैं, लेकिन यह कई बार खतरनाक और नियमों के खिलाफ हो सकता है.
विशेषज्ञों के अनुसार, ज्वलनशील गैस से भरे सिलेंडर को बंद और हवादार व्यवस्था के बिना वाहन में रखना जोखिम भरा है. गर्मी, झटका, रिसाव या गलत पोजिशन में रखने से विस्फोट की आशंका बढ़ जाती है.
नियम क्या कहते हैं?
सीएनजी या अन्य गैस से भरे सिलेंडर को साइकिल या दोपहिया वाहन पर ले जाना सुरक्षित नहीं माना जाता.
घरेलू या कमर्शियल सिलेंडर को वाहन में ले जाते समय उसे ठीक से सुरक्षित करना जरूरी है, ताकि वह हिल-डुल न सके.
सिलेंडर को झटकों से बचाया जाए और वाहन के अंदर कोई नुकीली चीज न हो.
सिलेंडर के वाल्व पर हमेशा सुरक्षात्मक कैप लगी होनी चाहिए.
क्षतिग्रस्त या लीक करने वाले सिलेंडर का परिवहन नहीं करना चाहिए.
वाहन अच्छी तरह हवादार हो और गंतव्य पर पहुंचते ही सिलेंडर उतार दिया जाए.
हालांकि निजी उपयोग के लिए सीमित संख्या में सिलेंडर ले जाना पूरी तरह गैरकानूनी नहीं है, लेकिन लापरवाही या गलत तरीके से परिवहन करने पर हादसा होने की स्थिति में कार्रवाई हो सकती है.
घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर में क्या फर्क?
घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर में मुख्य अंतर उनके उपयोग, रंग, वजन और कीमत का होता है.
घरेलू सिलेंडर आमतौर पर लाल रंग का होता है, जिसका वजन 14.2 किलो होता है. इसका इस्तेमाल घरों में खाना पकाने के लिए किया जाता है और इस पर सरकार की सब्सिडी मिलती है, इसलिए यह सस्ता होता है.
कमर्शियल सिलेंडर नीले रंग का होता है, जिसका वजन 19 किलो या उससे अधिक भी हो सकता है. इसका उपयोग होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और दुकानों में किया जाता है. इस पर कोई सब्सिडी नहीं मिलती, इसलिए इसकी कीमत ज्यादा होती है.
रायसेन की घटना एक चेतावनी है कि गैस सिलेंडर जैसी खतरनाक वस्तु को हल्के में नहीं लेना चाहिए. नियमों का पालन, सही तरीका और सावधानी ही ऐसे हादसों से बचाव का एकमात्र रास्ता है. थोड़ी-सी सतर्कता न केवल आपकी, बल्कि दूसरों की जान भी बचा सकती है.
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