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सांकेतिक तस्वीर
ED VS Mamta Banerjee: कोयला घोटाले से जुड़े IPAC मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. एजेंसी ने संविधान के आर्टिकल 32 के तहत याचिका दायर कर दावा किया है कि उसे निष्पक्ष जांच करने से रोका जा रहा है. ED का आरोप है कि राज्य की मशीनरी जांच में लगातार बाधा डाल रही है और उसके कानूनी अधिकारों का हनन हो रहा है.
क्या है ED की याचिका
ED की याचिका में अब तक की पूरी जांच प्रक्रिया और उससे जुड़े घटनाक्रम का विस्तार से उल्लेख किया गया है. एजेंसी के मुताबिक, कोयला घोटाले से जुड़ी बड़ी रकम एक खास कोल कंपनी में ट्रांसफर की गई थी. इसी मनी ट्रेल की जांच के दौरान यह सामने आया कि उस कंपनी का कनेक्शन IPAC से जुड़ा हुआ है. इसी आधार पर ED ने कंपनी के परिसरों पर छापेमारी की थी.
बताया रेड का मकसद
ED का कहना है कि रेड का मकसद अवैध लेन-देन से जुड़े ठोस सबूत जुटाना था, लेकिन छापेमारी के बाद हालात अचानक बदल गए. एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि रेड के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंच गई थीं. ED का दावा है कि मुख्यमंत्री वहां से जांच से जुड़े अहम दस्तावेज अपने साथ ले गईं. एजेंसी के अनुसार यह जांच प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप है और इससे सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका भी पैदा होती है.
कोलकाता HC का भी किया था रुख
इस पूरे मामले को लेकर ED पहले कोलकाता हाईकोर्ट भी पहुंची थी, लेकिन वहां सुनवाई के दौरान भारी हंगामा और शोर-शराबा देखने को मिला. हालात इतने बिगड़ गए कि अदालत को सुनवाई 14 जनवरी तक के लिए टालनी पड़ी. ED का कहना है कि इस देरी से जांच प्रभावित हो रही है और राज्य सरकार का रवैया एजेंसी के काम में रुकावट पैदा कर रहा है.
CBI जांच की भी अपील की
इन हालातों को देखते हुए ED ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है. एजेंसी ने मामले की CBI जांच कराने की भी अपील की है, ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो सके. अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर टिकी है, जहां इस हाई-प्रोफाइल मामले में अगला कदम तय होगा.
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