शहरी क्षेत्रों में आवासीय जरूरतों को पूरा करेगी योगी सरकार, बंद पड़े सार्वजनिक उपक्रमों की जमीन पर बनेंगे अपार्टमेंट

UP News: योगी सरकार ने शहरी क्षेत्रों में गरीबों की आवासीय जरूरत और उनके लिए रोजगार दिलाने की अहम पहल शुरू की है. जिसके तहत अब योगी सरकार सालों से बंद पड़े सार्वजनिक उपक्रमों की जमीन को वापस लेने जा रही है.

UP News: योगी सरकार ने शहरी क्षेत्रों में गरीबों की आवासीय जरूरत और उनके लिए रोजगार दिलाने की अहम पहल शुरू की है. जिसके तहत अब योगी सरकार सालों से बंद पड़े सार्वजनिक उपक्रमों की जमीन को वापस लेने जा रही है.

author-image
Suhel Khan
New Update
CM yogi adityanath on

योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश Photograph: (X@CMOfficeUP)

UP News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अब शहरी इलाकों में लोगों की आवासीय जरूरतों को पूरा करने पर ध्यान दे रही है. जिसके साथ ही योगी सरकार उद्योग लगाने की दिशा में भी तेज काम कर रही है. जिसके लिए योगी सरकार ने कई सालों से बंद पड़े केंद्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम की जमीन को वापस लेने का फैसला किया है. इसी जमीन पर अपार्टमेंट और उद्योग लगाए जाएंगे. सीएम योगी ने इसकी जिम्मेदारी 'स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन' को सौंप दी है. इसके साथ ही पूरी राज्य में ऐसी जमीन का ब्योरा इकट्ठा करने की दिशा में भी काम शुरू हो गया है. सरकार इन जमीनों को वापस लेकर शहरी इलाकों में अपार्टमेंट और उद्योग लगाएगी.

Advertisment

सालों से बंद पर उपक्रम की जमीन ली जाएगी वापस

बता दें कि केंद्र सरकार ने सार्वजनिक उपक्रम लगाने के लिए उत्तर प्रदेश से समय-समय पर काफी जमीन वापस ली है. इन पर लेदर फैक्ट्री, लाल इमली, कपड़ा उद्योग के साथ-साथ अन्य प्रकार के उपक्रम लगाए गए. हालांकि बदले दौर में इनकी उपयोगिता खत्म हो गई और ये उद्योग या उपक्रम बंद हो गए. इसके साथ ही कुछ कुछ मामलों का विवाद न्यायालयों में भी चल रहा है. ऐसे में राज्य सरकार चाहती है कि ऐसी जमीन को वापस लेकर उनको फिर से इस्तेमाल में लाया जाए.

क्योंकि इनमें अधिकांश जमीन शहर के प्रमुख स्थानों पर है. शहर के अंदर वाली ऐसी जमीन पर मिश्रित भू-उपयोग की अनुमति होगी. जिससे आवासीय के साथ व्यावसाय के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है. जबकि शहर के बाहर वाली जमीन को उद्योग लगाने लिए दिया जाएगा.

कानपुर और प्रयागराज में मिल चुकी है जमीन

सीएम योगी की इस पहल के बाद राज्य के दो जिलों से रिपोर्ट आई है. जो कानपुर और प्रयाराज की है. जिसमें बताया गया है कि कानपुर में एनटीसी म्योर मिल की 178,304, विक्टोरिया मिल 128,504, टैफ्को लाल इमली वूलेन मिल 898,706 वर्ग मीटर जमीन है. जबकि प्रयागराज में त्रिवेणी स्ट्रक्चरल्स लिमिटेड की 321 एकड़ और भारत पम्पस एंड कंप्रेसर्स लि की 295 एकड़ जमीन है. इनके अलावा राज्य के अन्य जिलों में भी सार्वजनिक उपक्रम की बड़ी संख्या में जमीन मौजूद है. जिनकी रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है.

ये भी पढ़ें: योगी सरकार ने राज्य के शिक्षकों और कर्मचारियों को दी सौगात, अब 25 लाख रुपये मिलेगी ग्रेच्युटी

यूपी को होगा भारी फायदा

स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन ने इस संबंध में जिलाधिकारियों और मंडलायुक्तों से रिपोर्ट मांगी है. उन्हें भेजे गए पत्र में कहा गया है कि केंद्र के सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम जैसे भारत लेदर कार्पोरेशन, टैफ्को आदि को उत्तर प्रदेश में जमीन दी गई थी. इनमें बहुत से उपक्रम लंबे समय से बंद पड़े हैं. अब ये जमीन अनुपयोगी पड़ी है. इस प्रकार की जमीन राज्य के पास वापस आ जाए तो उस पर कई प्रकार की आर्थिक गतिविधियां शुरू की जा सकती हैं. जिससे बड़ी संख्या में रोजगार पैदा होगा और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा. इससे राज्य सरकार के वन ट्रिलियन डालर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को पूरा करने में भी मदद मिलेगी.

ये भी पढ़ें: यूपी के 45 हजार कर्मचारियों को योगी सरकार का तोहफा, सैलरी में की गई इतनी बढ़ोतरी

UP News
Advertisment