योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: पारिवारिक दान विलेख पर अब और सस्ती होगी स्टांप ड्यूटी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में परिवार के सदस्यों के बीच निष्पादित अचल संपत्ति के दान विलेख (Gift Deed) पर दी जा रही स्टांप शुल्क छूट के दायरे को और व्यापक करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में परिवार के सदस्यों के बीच निष्पादित अचल संपत्ति के दान विलेख (Gift Deed) पर दी जा रही स्टांप शुल्क छूट के दायरे को और व्यापक करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है.

author-image
Dheeraj Sharma
New Update
UP CM Yogi Adityanath

उत्तर प्रदेश में संपत्ति हस्तांतरण से जुड़ी प्रक्रिया को सरल और किफायती बनाने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक अहम कदम उठाया है. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में परिवार के सदस्यों के बीच निष्पादित अचल संपत्ति के दान विलेख (Gift Deed) पर दी जा रही स्टांप शुल्क छूट के दायरे को और व्यापक करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है. इस फैसले से अब केवल आवासीय या कृषि भूमि ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों के दान पर भी बड़ी राहत मिलेगी.

Advertisment

अब कॉमर्शियल संपत्ति पर भी सिर्फ 5,000 स्टांप शुल्क

अब तक उत्तर प्रदेश में परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति दान करने पर स्टांप शुल्क में छूट केवल कृषि और आवासीय संपत्तियों तक सीमित थी. 3 अगस्त 2023 की अधिसूचना के तहत ऐसी संपत्तियों के दान पर अधिकतम 5,000 रुपए स्टांप शुल्क तय किया गया था.

योगी कैबिनेट के ताजा निर्णय के बाद यह सुविधा अब शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की सभी कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी पर भी लागू कर दी गई है.

पहले कितना देना पड़ता था स्टांप शुल्क?

स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल के अनुसार, वर्ष 2022 से पहले पारिवारिक रिश्तों में भी संपत्ति के दान पर पूरे सर्किल रेट के अनुसार स्टांप शुल्क देना पड़ता था.

- शहरों में कॉमर्शियल संपत्ति पर लगभग 7%

- ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 5%

अब चाहे शहर हो या गांव, परिवार के सदस्य को दान की गई किसी भी प्रकार की संपत्ति पर केवल 5,000 स्टांप शुल्क देना होगा.

कानूनी प्रावधानों में लाई गई स्पष्टता

कैबिनेट के फैसले के तहत पहले जारी अधिसूचना में वर्णित “परिवार के सदस्य” की परिभाषा और अन्य शर्तों को भी और स्पष्ट किया गया है. इससे निबंधन कार्यालयों में नियमों के क्रियान्वयन को लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं रहेगा.
भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 और रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 के तहत दान विलेख का पंजीकरण अनिवार्य रहेगा, लेकिन शुल्क का बोझ अब बेहद कम हो गया है.

आम जनता को क्या होगा फायदा?

इस निर्णय से क्या होगा...

- पारिवारिक संपत्ति का वैधानिक हस्तांतरण आसान होगा

- स्टांप शुल्क का भारी खर्च बचेगा

- कानूनी विवादों में कमी आएगी

- लोग दान विलेख के जरिए संपत्ति ट्रांसफर को प्राथमिकता देंगे

यह छूट राजपत्र (गजट) में अधिसूचना के प्रकाशन की तिथि से तत्काल प्रभाव से लागू होगी. सरकार का यह फैसला परिवारों और कारोबारियों दोनों के लिए राहत भरा माना जा रहा है.

यह भी पढ़ें - इंदौर त्रासदी के बाद अलर्ट पर योगी सरकार, घर-घर जाकर पानी के सैंपल लेंगे अधिकारी, लापरवाही पर होगी कार्रवाई

Yogi Adityanath Uttar Pradesh
Advertisment