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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ Photograph: (X@myogiadityanath)
UP News: सीएम योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से विकास कर रहे है. सीएम योगी राज्य के युवाओं से लेकर किसान, महिलाओं, बुजुर्गों समेत हर वर्ग पर विशेष ध्यान दे रहे हैं. ऐसे में योगी सरकार धार्मिक आयोजन के लिए भी अपना खजाना खोल रही है. दरअसल, अब योगी सरकार राज्य के शहरों में होने वाले छोट और बड़े दोनों प्रकार के धार्मिक मेलों का भी खर्च उठाएगी.
बता दें कि योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रांतीय मेले के लिए 50 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया था. जिसे अप्रैल 2026 तक खर्च किया जाना है. अब योगी सरकर नगर विकास विभाग निकायों से मेले के संबंध में प्रस्ताव मांग रही है. जिसमें पूछा जाएगा कि उनके यहां कितने प्रकार के धार्मिक मेलों का आयोजन होता है और उन मेलों का क्या ऐतिहासिक महत्व है. इन प्रस्तावों के आधार पर योगी सरकार निकायों को मेला खर्च के खर्च के लिए पैसा उपलब्ध कराएगी.
जनता को ऐतिहासिक महत्व बताना है वजह
बता दें कि शहरी क्षेत्रों में लगने वाले मेले और धार्मिक आयोजन का पैसा खर्च करने के पीछे योगी सरकार का मकसद लोगों को इनका ऐतिहासिक महत्व बताना है. दरअसल, उत्तर प्रदेश में काफी संख्या में ऐसे मेलों को आयोजन होता है, लेकिन लोगों को उनके बारे में अधिक जानकारी नहीं होती. हालांकि, स्थानीय स्तर पर इन मेलों का काफी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व होता है. उदाहरण के तौर पर राज्य के बलरामपुर जिले के देवीपाटन मंदिर पर नवरात्र में लगने वाला मेला काफी महत्वपूर्ण होता है. लेकिन ज्यादातर लोग इस धार्मिक मेले के महत्व के बारे में नहीं जानते. इस मेले में यूपी ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों के भी हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं.
शासन ने सभी जिलों से मांगे प्रस्ताव
इसी तरह से राज्य के दूसरे शहरों में भी इसी प्रकार के तमाम मेले लगते हैं लेकिन उनके बारे में स्थानीय लोगों को छोड़कर ज्यादा जानकारी नहीं होती. ऐसे में सरकार ने उच्च स्तर पर फैसला लिया है कि स्थानीय धार्मिक मेलों का प्रांतीयकरण किया जाए. जिसका खर्च सरकार वहन करे. इसके लिए योगी सरकार ने राज्य के सभी जिलों से इसके लिए प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा है. अब शासन स्तर पर यह देखा जा रहा कि प्रदेश के कितने जिलों से धार्मिक मेलों के संबंध में प्रस्ताव आ चुके हैं और कितने नहीं आए हैं.
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