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ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर की मौत के मामले में एक और FIR Photograph: (Social Media/File)
Nodia Engineer Death: नोएडा सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की डूबने से हुई मौत के मामले में अब जांच ने नया मोड़ ले लिया है. इस केस में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एंट्री हो चुकी है. अब जांच एजेंसी स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट आवंटन में MJ विजटाउन बिल्डर की भूमिका की बारीकी से पड़ताल करेगी. माना जा रहा है कि यह जांच सिर्फ हादसे तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उससे जुड़े प्रशासनिक फैसलों और जमीन के लेन-देन तक जाएगी.
वहीं पुलिस का एक और बड़ा एक्शन देखने को मिला है. इंजीनियर मौत मामले में पुलिस ने आरोपी बिल्डरों के दफ्तरों को सील कर दिया है. सेक्टर 126 स्थित कॉरपोरेट ऑफिस को भी सील किया गया है.
रातों-रात फाइलें लेकर गई CBI
सूत्रों के मुताबिक, CBI ने 21 जनवरी की रात नोएडा प्राधिकरण से MJ विजटाउन से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें अपने कब्जे में ले लीं. बताया जा रहा है कि स्पोर्ट्स सिटी के प्लॉट का एक हिस्सा MJ विजटाउन को बेचा गया था, जिसकी प्रक्रिया और शर्तों को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं. इसी कड़ी में CBI की टीम अब यह भी जांच करेगी कि आवंटन में नियमों का पालन हुआ या किसी स्तर पर गड़बड़ी की गई.
दो FIR और तीन गिरफ्तारियां
इस मामले में नोएडा पुलिस पहले ही दो एफआईआर दर्ज कर चुकी है. वहीं अब तक तीन लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है. पुलिस की शुरुआती जांच में लापरवाही के संकेत मिलने के बाद मामला और गंभीर हो गया था. अब CBI के आने से उम्मीद की जा रही है कि केस की जांच व्यापक दायरे में होगी और जिम्मेदार पक्षों की भूमिका स्पष्ट होगी.
हादसा जहां हुआ, वह प्लॉट स्पोर्ट्स सिटी का हिस्सा
जिस गहरी खाई में पानी भरने के कारण युवराज मेहता की मौत हुई थी, वह जगह स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट नंबर-2 के ए-3 प्लॉट में आती है. जानकारी के अनुसार, प्लॉट नंबर-2 का उपविभाजन नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों की ओर से स्वीकृत किया गया था. करीब 27,185 वर्ग मीटर भूमि का भू-उपयोग लेआउट में कॉमर्शियल दर्शाया गया है. अब सवाल उठ रहा है कि जब यह व्यावसायिक जमीन है, तो सुरक्षा और निर्माण मानकों को लेकर निगरानी इतनी कमजोर क्यों रही.
129 करोड़ बकाया, फिर भी सवालों में आवंटन
जांच में यह भी सामने आया है कि MJ विजटाउन पर नोएडा अथॉरिटी का करीब 129 करोड़ रुपये बकाया है. ऐसे में यह बिंदु भी जांच का विषय बन गया है कि बकाया होने के बावजूद कंपनी की गतिविधियों पर नियंत्रण और जवाबदेही तय क्यों नहीं हुई. CBI अब वित्तीय लेन-देन और प्राधिकरण की भूमिका को भी खंगाल सकती है.
फॉरेंसिक टीम ने किया मौके का बारीकी से निरीक्षण
मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम भी घटनास्थल पर पहुंची थी. टीम ने पूरे क्षेत्र को घेरकर इंच-बाय-इंच जांच की और उस स्थान का निरीक्षण किया जहां कार अनियंत्रित होकर पानी से भरे गहरे गड्ढे में जा गिरी थी. शुरुआती रिपोर्ट में सुरक्षा रेलिंग और ठोस बैरिकेडिंग की कमी को हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है.
अब आगे क्या?
CBI की जांच के बाद इस मामले में कई नए खुलासे संभव हैं। यह केस अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और बिल्डर सिस्टम की कार्यशैली पर भी बड़ा सवाल बन चुका है.
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